अनिश्चितकालीन हड़ताल का चौथा दिन, NHM महिला कर्मचारियों ने हाथों में मेंहदी से लिखी अपनी मांगे, स्वास्थ्यकर्मियों ने खून से लिखा पत्र -वंदना राजपूत
Fourth day of indefinite strike, NHM women employees wrote their demands with henna on their hands, health workers wrote letters with blood - Vandana Rajput
गरियाबंद : छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के 16,000 से ज्यादा कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों (नियमितीकरण, ग्रेड पे, पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना, लंबित 27% वेतन वृद्धि सहित को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं. आंदोलन के चलते पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है.
आंदोलन के चौथे दिन महिला कर्मचारियों ने दस सूत्रीय मांगो को अपने हाथों मेंहदी से लिखकर विरोध जताया. हाथों पर ऊकेरी गईं ये मेंहदी का रंग लंबित मांगो को लिए बिना आंदोलन से नहीं हटने की प्रेरणा देगा ऐसी भावनाओं के साथ आंदोलन स्थल पर उल्लास से भाग लिया.
सीएचओ संघ की अध्यक्ष प्रीति पांडे ने कहा कि कर्मचारियों ने कई बार मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी जायज मांगें रखीं है लेकिन लगातार अनदेखी की गई. यहां तक कि 27% वेतनवृद्धि, मेडिकल अवकाश और ग्रेड पे पर स्वीकृति मिलने के बावजूद आदेश जारी नहीं किए गए. जिससे नाराज़ कर्मचारी अब हड़ताल पर हैं.
वंदना साहू ने गीतों में मांगों को पिरोकर कहा कि हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावित करने के लिए सरकार ही जिम्मेदार है जिन्हे मजबूर किया जा रहा है. लगातार आंदोलन के लिए पर शासन प्रशासन आँख मुंद कर नजरअंदाज करती हैं.
मरीजों को दवाइयाँ उपलब्ध नहीं.
नवजात शिशु वार्ड बंद सहित पोषण आहार केंद्र बंद पड़े हैं.
शुगर, ब्लड टेस्ट, ट्रूनाट, सीबीनाट से बलगम टेस्ट और नेत्र जाँच बाधित,
स्कूल व आंगनबाड़ी स्वास्थ्य परीक्षण पूरी तरह ठप
रूटीन टीकाकरण बंद
टीबी, मलेरिया, कुष्ठ जैसी बीमारियों के मरीजों को दवाइयाँ नहीं मिल रही है. सुदूर ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के कई अस्पतालों में अव्यवस्था बढ़ गई है और कई अस्पताल पूरा बंद होने की कगार पर हैं.
क्षमा शर्मा ने साफ चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया तो आगे आंदोलन को और उग्र किया जाएगा. जिसकी जिम्मेदारी शासन की होंगी.
मंच पर अन्य वक्ता के रूप में अमृत राव भोंसले जिलाध्यक्ष, भूपेश साहू, भूपेंद्र सिन्हा, प्रांतीय प्रतिनिधि, रजत महतो उपाध्यक्ष, कमलेश्वर ढीढी सचिव, संदीप वर्मा, योगेश साहू, मीडिया प्रभारी, डॉ शंकर पटेल, डॉ योगेंद्र रघुवंशी संरक्षक, दीपेश टांडी, गौरव यादव अध्यक्ष छुरा ब्लॉक, पूजा साहू, डॉ लक्ष्मी कांत ठाकुर, डॉ लक्ष्मी नारायण आर. बी. एस. एस. के., गोविन्द साहू अध्यक्ष ब्लॉक राजिम, धीरज शर्मा अध्यक्ष ब्लॉक गरियाबंद, टिकेश साहू कोषाध्यक्ष, अनीश अख्तर, पूजा साहू जिला अस्पताल, इंद्र कुमार चंद्राकर बी पी एम छुरा, शेखर धुर्वे बी. पी. एम. गरियाबंद, तुजेंद्र दीवान बी.,डॉ चेतन नाग, युलिका देवांगन, पारुल सिन्हा सी एच ओ,वंदना साहू, युलिका देवांगन, लेखन साहू, उमेश सोनी, डॉ अरुण कुमार अवधिया, पुष्पा कुर्रे अध्यक्ष ब्लॉक मैनपुर मौजूद रहे.
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रायपुर : छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं. इस बीच महिला कर्मचारियों द्वारा सरकार को खून से पत्र लिखने का मामला सामने आया है. इसे लेकर प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि सरकार की नाकामी और लापरवाही का यह हाल है कि कर्मचारी खून से पत्र लिखने को मजबूर हो गए हैं.
वंदना राजपूत ने कहा कि भाजपा सरकार कर्मचारियों के साथ किए गए वादों को पूरा नहीं कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि डबल इंजन की सरकार ने मोदी की गारंटी पर सत्ता हासिल की. लेकिन आज हर विभाग के कर्मचारी अपनी समस्याओं को लेकर आंदोलन कर रहे हैं.
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि विष्णु देव साय सरकार के कुशासन में पटवारी, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार, शिक्षक, रसोईया और सफाईकर्मी सभी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल कर चुके हैं. सरकार चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करती है. लेकिन सत्ता में आने के बाद कर्मचारियों की परेशानियों से कोई वास्ता नहीं रखती है. आज भाजपा सरकार में कर्मचारियों के खून की कोई कीमत नहीं है.
वंदना राजपूत ने बताया कि एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं. हेल्थ सेंटर बंद होने से टीकाकरण और इलाज के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में संक्रमण बढ़ने से आम लोगों को इलाज की जरुरत होती है. लेकिन सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बंद होने से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार मुश्किल में हैं क्योंकि प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराना उनके लिए संभव नहीं है.
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि तीज महिलाओं के लिए खास त्योहार है. लेकिन इस समय भी महिला कर्मचारियों को आंदोलन करना पड़ रहा है. सरकार महिलाओं के अधिकारों की बड़ी-बड़ी बातें करती है. लेकिन उनकी समस्याओं को सुनने को तैयार नहीं है. कर्मचारी खून से पत्र लिख रहे हैं और सरकार विदेश दौरों में व्यस्त है.
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