चुनाव आयोग के प्रिंसिपल सेक्रेट्री ने माना कि इलेक्शन कमीशन ने नहीं लिया SIR का फैसला, Civil Activist अंजली भारद्वाज का बड़ा खुलासा
The Election Commission's Principal Secretary admitted that the Election Commission did not take the SIR decision, a major revelation by civil activist Anjali Bhardwaj.
नई दिल्ली : आरटीआई कार्यकर्ता अंजली भारद्वाज ने कहा कि मैंने चुनाव आयोग को दिए अपने सूचना के अधिकार (RTI) आवेदन में एक सीधी-सी प्रार्थना की थी. मैंने उस फाइल में मौजूद विवरण मांगे थे. जिसके आधार पर देश में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) का फैसला लिया गया था. चुनाव आयोग के प्रधान सचिव ने अपने जवाब में मुझे बताया कि आयोग द्वारा ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया था.
आरटीआई कार्यकर्ता अंजली भारद्वाज का दावा है कि चुनाव आयोग के एक प्रधान सचिव ने घोषणा किया कि उन्होंने SIR का निर्णय नहीं लिया था. अगर चुनाव आयोग ने SIR आयोजित करने का फैसला नहीं लिया तो किसने लिया? जुलाई से एसआईआर की कानूनी वैधता को चुनौती देने वाले मामले की सुनवाई कर रहे सर्वोच्च न्यायालय में, ईसीआई ने बार-बार दावा किया है कि उसे SIR आयोजित करने का अधिकार है और उसने 2002-03 में भी इसी तरह का एक एसआईआर आयोजित किया था.
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में यह बताया है कि यद्यपि चुनाव आयोग के नियमों में एक निर्वाचन क्षेत्र या उसके कुछ हिस्सों में ‘गहन संशोधन’ का प्रावधान है. लेकिन पूरे राज्य में, और उससे भी कम पूरे देश में इस तरह के व्यापक संशोधन की अनुमति नहीं है.
उन्होंने यह भी बताया है कि नियमों में यह निर्धारित है कि वार्षिक सारांश संशोधनों के विपरीत मतदाता सूचियों का ‘गहन संशोधन’ सिर्फ चुनाव आयोग द्वारा लिखित में कारण बताए जाने के बाद ही किया जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा है कि ऐसे गहन संशोधन उन निर्वाचन क्षेत्रों या उनके हिस्सों में किए जा सकते हैं. जहां अचानक जनसांख्यिकीय परिवर्तन हुए हों.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb?mode=ac_t



