रामकृष्ण अस्पताल के सेप्टिक टैंक में तीन मजदूरों की मौत, मृतकों के परिवार को 30 लाख रुपए मुआवजे का ऐलान, 9 साल में 622 सफाई कर्मचारियों की गई जान
रामकृष्ण अस्पताल के सेप्टिक टैंक में तीन मजदूरों की मौत, मृतकों के परिवार को 30 लाख रुपए मुआवजे का ऐलान, 9 साल में 622 सफाई कर्मचारियों की गई जान
रायपुर : रायपुर में रामकृष्ण केयर अस्पताल के सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान तीन मजदूरों की दुखद मौत हो गई. यह हादसा मंगलवार शाम को हुआ. जिसमें जहरीली गैस से दम घुटने के कारण तीनों की जान चली गई. एक अन्य मजदूर घायल है. और उसका इलाज चल रहा है.
रायपुर के पचपेड़ी क्षेत्र में स्थित रामकृष्ण केयर अस्पताल के सेप्टिक टैंक (करीब 50 फीट गहरा) की सफाई के लिए मजदूरों को बुलाया गया था. पहले एक मजदूर टैंक में उतरा। लेकिन अचानक बेहोश हो गया. उसे बचाने के लिए बाकी दो साथी भी नीचे गए. लेकिन वे भी जहरीली गैस (जैसे मीथेन या हाइड्रोजन सल्फाइड) की चपेट में आ गए. तीनों मजदूर मौके पर ही दम घुटने से मर गए. मृतकों की पहचान गोविंद सेंद्रे, अनमोल मांझी और सत्यम कुमार के रूप में हुई है. ये तीनों रायपुर के सिमरन सिटी इलाके के रहने वाले थे. एक अन्य मजदूर प्रशांत कुमार का इलाज अस्पताल में जारी है.
सुरक्षा उपकरणों की कमी
परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि मजदूरों को कोई उचित सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए थे। उन्हें सिर्फ मास्क दिया गया और भरोसा दिलाया गया कि टैंक में कोई खतरा नहीं है. गैस टेस्टिंग, वेंटिलेशन, ऑक्सीजन सपोर्ट, सेफ्टी हार्नेस या रेस्क्यू लाइन जैसे जरूरी उपकरणों का इस्तेमाल नहीं किया गया। यह लापरवाही का साफ मामला माना जा रहा है.
परिजनों का आक्रोश और हंगामा
इस हादसे की खबर मिलते ही मृतकों के परिजन और स्थानीय लोग अस्पताल पहुंचे. वे गुस्से में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नारे लगाने लगे और मुआवजे की मांग करने लगे. परिजन अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए. हालात को देखते हुए पुलिस ने भारी बल तैनात किया. पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजनों से बातचीत की. उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया.
अस्पताल प्रबंधन और पुलिस की प्रतिक्रिया
अस्पताल प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को मुआवजे की घोषणा की है. अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि प्रत्येक मृतक के परिवार को 30 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा. और मृतक परिवार के बच्चों को फ्री एजुकेशन अस्पताल के द्वारा दिया जाएगा. सेफ्टी इक्विपमेंट देने और लापरवाही के सवाल पर अस्पताल प्रबंधन का कहना था कि सफाई की जिम्मेदारी कॉन्ट्रैक्ट के तहत किसी अन्य कंपनी को दी गई थी और उसे कंपनी के मालिक के परिजनों में से ही एक की मौत हुई है.
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है. एडीसीपी वेस्ट राहुल देव शर्मा ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी. यह घटना एक बार फिर सफाई मजदूरों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है. ऐसे हादसों को रोकने के लिए सख्त नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है.
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52 परिवारों को कोई मुआवजा नहीं मिला
2017 से अब तक भारत में सीवर और सेप्टिक टैंक की घटनाओं में कम से कम 622 सफाई कर्मियों की मौत हुई है. लेकिन प्रभावित परिवारों में से 52 को कभी मुआवजा नहीं मिला. छह मामलों को बिना किसी समाधान के बंद कर दिया गया. फ़िलहाल छत्तीसगढ़ में तीन लोगों की सेप्टिक टैंक में डूबकर मौत हो गई.
21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज 622 मौतों में से 539 परिवारों को पूरा मुआवजा मिला, 25 को आंशिक मुआवजा मिला, और 52 को कुछ नहीं मिला. छह मामले बंद हो गए. उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा सीवरेज लाइन में मौतें दर्ज की गईं. 86, उसके बाद महाराष्ट्र में 82, तमिलनाडु में 77, हरियाणा में 76, गुजरात में 73 और दिल्ली में 62 मृत्यु और मुआवजा प्राप्त करने वाले परिवारों की संख्या के बीच सबसे बड़ा अंतर उत्तर प्रदेश में दिखा, जहां 86 में से 13 परिवारों को कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली और दो को सिर्फ आंशिक भुगतान हुआ.
दिल्ली में 62 परिवारों में से नौ को कुछ नहीं मिला. गुजरात में दो परिवार बिना मुआवजे के हैं और एक मामला बंद हुआ। महाराष्ट्र में नौ परिवारों को कोई भुगतान नहीं हुआ. उत्तर प्रदेश के जिला-स्तरीय आंकड़ों में चंदौली जिले में चार मौतें दर्ज हुईं और कोई मुआवजा नहीं दिया गया. अंबेडकर नगर में दो मौतें, दोनों बिना मुआवजे के. गौतम बुद्ध नगर में 16 मौतें. आठ मामलों में पूरा मुआवजा, छह में कुछ नहीं, और दो मामले बंद हो गए.
सरकार ने बताया कि 2013 के प्रतिषेध अधिनियम और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013 के तहत 2023 में कराए गए सर्वेक्षण में देश भर के किसी भी जिले में मैनुअल स्कैवेंजर नहीं पाए गए. हालाँकि, 2013 और 2018 के दो पूर्व सर्वेक्षणों में 58,098 मैनुअल स्कैवेंजर पहचाने गए थे. जिनमें उत्तर प्रदेश अकेला 32,473 के साथ आधे से ज्यादा था.
इन सभी 58,098 और उनके आश्रितों को 40,000 रुपये की एकमुश्त नकद सहायता दी गई. 27,928 लोगों को कौशल विकास प्रशिक्षण दिया गया. स्व-रोजगार के लिए 2,679 को 5 लाख रुपये तक की पूंजी सब्सिडी दी गई.
सरकार ने 2023-24 में नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम (NAMASTE) शुरू किया, जिसका मकसद सेप्टिक टैंक और सीवर की सफाई को मशीनीकृत कर मैनुअल स्कैवेंजिंग को खत्म करना है. इस कार्यक्रम के तहत सीवर और सेप्टिक टैंक वर्कर्स (SSWs) को पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं.
“NAMAST”E के तहत 31 दिसंबर 2025 तक देश भर में 89,114 सेप्टिक टैंक वर्कर्स को वैलिडेट किया गया. उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 12,418, उसके बाद महाराष्ट्र 8,595, गुजरात 7,634, पश्चिम बंगाल 7,630 और तमिलनाडु 6,981।
12 मार्च 2026 तक यह संख्या थोड़ी बढ़कर 89,248 हो गई। 2024-25 में लाभार्थियों में जोड़े गए वेस्ट पिकर्स की संख्या देश भर में 2,34,425 है, जिसमें उत्तर प्रदेश में 35,641 शामिल हैं. पिछले साल दिसंबर तक वैलिडेटेड सभी सेप्टिक टैंक वर्कर्स में से 73,864 (82.88 प्रतिशत) आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना या राज्य स्वास्थ्य योजनाओं में नामांकित हैं.
मंत्रालय ने संसद को बताया कि मशीनीकरण के बाद सफाई कर्मियों की औसत आय में वृद्धि का डेटा नहीं रखा जाता। साथ ही यह भी कहा कि मशीनीकरण से दक्षता या उत्पादकता में सुधार दिखाने वाले कोई मापने योग्य संकेतक नहीं है.
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग को 2025 में 842 शिकायतें मिलीं, जिनमें वेतन न मिलना, सुरक्षा उपकरण न देना और जाति आधारित भेदभाव शामिल था. सबसे ज्यादा शिकायतें दिल्ली से 140, उसके बाद उत्तर प्रदेश से 130 और महाराष्ट्र से 95। ठेकेदारों या नागरिक निकायों के खिलाफ मशीनीकरण नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का डेटा केंद्रीय रूप से नहीं रखा जाता. क्योंकि सफाई सातवीं अनुसूची के तहत राज्य विषय है.
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