फर्जी नर्सिंग होम में नसबंदी सर्जरी के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से महिला की मौत, डॉक्टर और कंपाउंडर फरार, जान की कीमत 3 लाख 51 हजार!
A woman died due to doctor's negligence during sterilization surgery in a fake nursing home, doctor and compounder absconded, the cost of life was Rs 3 lakh 51 thousand
अस्पताल में नसबंदी सर्जरी के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से महिला की हालत नाजुक, ओटी बंद
बिलासपुर : बिलासपुर के जरहाभाठा स्थित एसकेबी मल्टी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और जिला अस्पताल के डॉक्टर की लापरवाही से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है. नसबंदी कराने आई महिला की सर्जरी में लापरवाही की वजह से उसकी हालत बिगड़ गई. इस मामले में परिजनों की शिकायत पर सीएमएचओ ने जांच के आदेश दिए थे. अब नर्सिंग होम एक्ट की टीम ने एसकेबी हॉस्पिटल की ऑपरेशन थिएटर को मानकों के अनुरुप न पाकर फौरन बंद करने का निर्देश दिया है.
मस्तूरी के वार्ड 14 निवासी विष्णु कुमार 20 दिसंबर को अपनी पत्नी सुमन को नसबंदी के लिए जिला अस्पताल लाए. स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वंदना चौधरी ने जिला अस्पताल में स्टाफ की कमी बताते हुए सुमन को अपने प्राइवेट अस्पताल (एकेबी मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल) भेजा और ऑपरेशन किया. डॉक्टर ने बिना एनेस्थेसिया विशेषज्ञ के खुद ऑपरेशन किया. ऑपरेशन के बाद 24 दिसंबर को महिला की तबीयत बिगड़ी और उसकी आंत में छेद पाया गया. नाजुक हालत में महिला को अपोलो रेफर किया गया. जहां अब वह वेंटिलेटर पर है.
इधर शिकायत के बाद सीएमएचओ ने जांच टीम गठित कर कार्रवाई शुरु की.. नर्सिंग होम एक्ट के तहत प्राइवेट अस्पताल की ओटी में खामियां पाई गईं और इसे फौरन बंद करने के निर्देश दिया गया. डॉक्टर और अस्पताल दोनों पर अलग-अलग जांच चल रही है.
इस तरह की लापरवाही से मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. सरकारी डॉक्टर का निजी अस्पताल में मानकों के बिना ऑपरेशन करना स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है. प्रशासन ने कार्रवाई शुरु कर दी है. लेकिन सवाल यह है कि ऐसी घटनाएं कब थमेंगी और मरीजों को सुरक्षित इलाज का भरोसा कब मिलेगा?
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/CvTzhhITF4mGrrt8ulk6CI
रुपौली : पूर्णिया की तरह अब रुपौली में भी फर्जी नर्सिंग होम खुल गए हैं. ऐसे ही एक फर्जी नर्सिंग होम में गुरुवार 16 जनवरी को इलाज के दौरान एक 35 साल की महिला की मौत हो गई. मरीज के मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया. हंगामा को बढ़ता देख डॉक्टर और कंपाउंडर पीछे की गेट से फरार हो गए. मामला रुपौली के मेही नगर स्थित मिम्स हॉस्पिटल का है.
मिली जानकारी के मुताबिक रुपौली बस्ती का रहने वाला बबलू पासवान अपनी पत्नी किरण देवी को प्रसव पीड़ा होने पर रुपौली रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया था. जहां हालत नाजुक देखते हुए उसे पूर्णिया रेफर कर दिया गया था. हालांकि मिम्स हॉस्पिटल के दलालों ने महिला को अपने अस्पताल ले आया. जहां उसका सीजर ऑपरेशन किया गया. ऑपरेशन के दौरान ही महिला की मौत हो गई.
मरीज के मौत के बाद हॉस्पिटल संचालक धर्मवीर कुमार अपने तथाकथित समाजसेवियों को भेजकर मरीज के परिजन को मनाने का भरपूर प्रयास किया. हालांकि परिजन दोषियों पर कार्यवाई की मांग पर अड़े रहे. वहीं मृतका के परिजनों के बीच करीब 6 घंटे तक हाईवोल्टेज ड्रामा चलता रहा. आखिरकार जीत नर्सिंग होम के संचालक की ही हुई. स्थानीय नेता और दबंगो ने परिजनों को यह कहकर समझौते के लिए राजी कर लिया कि तुम लोग गरीब आदमी हो.. डॉक्टर का क्या बिगाड़ लोगे? ऊपर से नीचे तक सब रुपये पर मैनेज हो जाएगा. आखिर लड़ने से तुमको क्या मिलेगा. थक हार कर मृतक के परिजन स्थानीय लोगों के झांसे में आकर समझौता पत्र पर हस्ताक्षर 3 लाख 51 हजार लेकर कर दिया. वहीं पुलिस में बिना रिपोर्ट किए परिजनों ने शव का दाह संस्कार कर दिया.
मिम्स अस्पताल में इलाज के दौरान 35 साल की महादलित महिला की जान की कीमत 3 लाख 51 हजार लगाकर पंचायत ने नर्सिंग होम के संचालक को क्लीन चिट दे दिया. पंचायत में तय हुआ कि मृतका किरण देवी को पांच बच्चे हैं. वहीं एक नवजात भवानीपुर बेबी केयर वार्ड में बुधवार की देर रात जन्म के बाद से जिंदगी और मौत से जूझ रहा है. ऐसे में मां की मौत के बाद इन बच्चों के परवरिश के लिए आर्थिक मदद की जरुरत है. जिसके लिए नर्सिंग होम संचालक ने दो लाख और एक लाख 26 हजार और 25 हजार दाह संस्कार के लिए दिया. समझौता पत्र पर पंचों ने मृतिका किरण देवी की बड़ी बेटी से दस्तखत करवा लिया. साथ ही गवाह के तौर पर मृतका के भाई बबलू पासवान से भी दस्तखत करवा लिए गए है. पंचों के इस फरमान से लोगों के बीच काफी नाराजगी देखी जा रही है.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/CvTzhhITF4mGrrt8ulk6CI




