हसदेव अरण्य में डंडे के बल पर 11 हजार पेड़ों की कटाई जारी, नाराज ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, कहा- आखरी सांस तक जंगल बचाने लड़ेंगे

Cutting of 11 thousand trees continues with sticks in Hasdev Aranya angry villagers submitted a memorandum to the Chief Minister said - will fight to save the forest till my last breath

हसदेव अरण्य में डंडे के बल पर 11 हजार पेड़ों की कटाई जारी, नाराज ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, कहा- आखरी सांस तक जंगल बचाने लड़ेंगे

कोरबा : जैव विविधताओं से भरे हसदेव अरण्य क्षेत्र में अडानी फाउंडेशन के राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के परसा -केते -बासेन फेस -2 कोल ब्लॉक -2 के कोयला उत्खनन के लिए वनों की कटाई से हो रहे विनाश को रोकने हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले नाराज ग्रामीण लगातार विरोध जता रहे हैं. इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम ज्ञापन पुलिस चौकी मोरगा के प्रभारी ( थाना बांगो) को सौंपा गया.
नाराज ग्रामीणों ने चौकी पहुंच मुख्यमंत्री के ज्ञापन सौंपकर कहा कि ग्रामसभा की फर्जी सहमति ,राज्यपाल के जांच निर्देश का पालन नहीं हो रहा है. हसदेव अरण्य में डंडे के बल पर परसा -केते -बासेन फेस -2 कोल ब्लॉक के लिए 11 हजार पेड़ों की कटाई जारी है.
बड़ी तादाद में चौकी पहुंचे ग्रामीणों ने कहा कि उत्तरी छत्तीसगढ़ में स्थित हसदेव अरण्य के सघन वनों को “छत्तीसगढ़ के फेफड़े” के नाम से जाना जाता है. यह महत्वपूर्ण वन क्षेत्र जैव विविधता से परिपूर्ण, वन्यजीवों का महत्वपूर्ण रहवास और मिनीमाता बांगो बाँध का जलागम क्षेत्र है. जिससे 4 लाख हेक्टेयर जमीन सिंचित होती है. यह क्षेत्र लगातार कोयला खनन के कारण विनाश का खतरा झेल रहा है.
भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा हसदेव अरण्य की जैवविविधता अध्ययन रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि हसदेव में कोयला खनन के अपरिवर्तनीय प्रभाव पड़ेंगे. हसदेव में किसी भी नई खनन परियोजना को स्वीकृति नहीं दी जानी चाहिए. बल्कि इसे खनन के लिए नो-गो एरिया घोषित किया जाना चाहिए. हसदेव में खनन से हाथी मानव द्वन्द की स्थिति इतनी विकराल हो जाएगी कि राज्य इस समस्या को संभाल नहीं पाएगा. छत्तीसगढ़ की विधानसभा द्वारा 26 जुलाई 2022 को सर्वसम्मति से हसदेव अरण्य में सभी कोल ब्लॉक को निरस्त करने के लिए अशासकीय संकल्प पारित किया गया.
कूटरचित दस्तावेज से ग्राम सभा की फर्जी सहमति
सम्पूर्ण हसदेव अरण्य पांचवी अनुसूची क्षेत्र है जहाँ पर ग्रामसभा के निर्णय सर्वोपरि हैं. हसदेव की ग्रामसभाओं ने कोयला खनन परियोजना का लगातार विरोध किया है. परसा कोल ब्लॉक से प्रभावित ग्रामसभाओं के लगातार विरोध के बावजूद कम्पनी द्वारा कूटरचित फर्जी ग्रामसभा सहमति के दस्तावेज बनाकर वन भूमि डायवर्सन की स्वीकृति हासिल की गई. स्थानीय समुदाय द्वारा फर्जी ग्रामसभा की जांच करने स्थानीय प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री और राज्यपाल तक को गुहार लगाई गई.
राज्यपाल ने फर्जी प्रस्ताव की जांच करने और सभी कार्यवाहियों को स्थगित रखने के लिए मुख्य सचिव को पत्र लिखा. लेकिन आज तक जांच नहीं हुई. मौजूदा परसा ईस्ट केते बासन (PEKB) खदान के फेस ।। में खनन को आगे बढ़ाने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में दबावपूर्वक भूमि अधिग्रहण की ग्रामसभा की गई. जिसमे लोगों के विरोध को दरकिनार कर ग्राम सभा कार्यवाही पंजी में खाली जगह छोड़कर रखी गई और बाद में उसमे सहमति का प्रस्ताव लिखा गया.
लगातार विरोध के बावजूद कोयला खनन को बढ़ाना दु:खद
हसदेव के आदिवासी समुदाय अपने संविधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण संघर्ष कर रहे हैं. यह बेहद दु:खद है कि पांचवी अनुसूची क्षेत्र होने के बावजूद यहां की ग्राम सभाओं के लगातार विरोध के बावजूद भी कोयला खनन को आगे बढ़ाया जा रहा है. हमारे लिए यह समझना जरुरी है कि कोयले के विकल्प के रुप में आज अन्य ऊर्जा स्त्रोत मौजूद हैं. लेकिन ऐसे प्राकृतिक वन एक बार नष्ट हो गए तो इनका कोई और विकल्प नहीं है. हसदेव अरण्य के विनाश को रोकना पर्यावरण, आदिवासी समुदाय के संविधानिक अधिकारों की रक्षा, वन्यजीवों की सुरक्षा और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए जरुरी है. इसलिए राज्य के हित में हसदेव अरण्य के वनों के विनाश को रोकने के लिए फौरन कार्यवाही के लिए सादर निवेदन है.
लगातार काटे जा रहे पेड़ डीएफओ से मीटिंग में नहीं निकला नतीजा, ग्रामीणों ने कहा जब तक जान रहेगी जंगल बचाने लड़ेंगे.
परसा ईस्ट एवं केते बासेन कोल परियोजना फेस- 2 के लिए पेंड्रामार घाटबर्रा में 11 हजार पेड़ों की कटाई का काम शुरु होने के साथ ही विरोध भी तेज हो गया है. प्रदर्शनकारियों के साथ ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन के जंगल के चारों तरफ पहरा दे प्रदर्शन शुरु कर दिया है. पहले से ही तैनात भारी तदा में पुलिस बल ने गुरुवार रात से ही धरपकड़ शुरु कर दी और अब तक डेढ़ सौ से ज्यादा प्रदर्शनकारियों लखनपुर, दरिमा, उदयपुर और सीमावर्ती थानों के जिले भेजा गया है. लेकिन इसके बाद भी विरोध प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारी ग्रामीण पीछे नहीं हट रहे हैं. जंगलों के भीतर पेंड कटाई का नारेबाजी कर विरोध जता रहे हैं.
बंदूक की नोंक पर की जा रही पेड़ कटाई से लेकर पुलिस की कार्रवाई की वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है. जिसने विरोध प्रदर्शन को और हवा दे दी है. ग्रामीण लगातार सोशल मीडिया के जरिए यह संदेश दे रहे हैं वे इस दमनात्मक कार्रवाई से नहीं डरेंगे. नहीं झुकेंगे. आखरी सांस तक जल जंगल जमीन को बचाने लड़ाई लड़ेंगे.
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ब्लॉगर दीपक पटेल को अदानी कंपनी के गुंडों ने घेरकर एक घंटे तक बंधक बनाकर रखा

दीपक पटेल का एक विडियो वायरल हो रहा है. जिसमें वो बता रहें है कि छत्तीसगढ़ में किस तरह अदानी राज चल रहा है. यह वीडियो भी उसकी मिसाल है. गुजरात से आकर एक कंपनी छत्तीसगढ़ के लोगों को कह रही है कि वे बाहरी हैं. आंदोलनरत ग्रामीणों को समर्थन या उनकी बात को मीडिया या सोशल मीडिया के जरिए प्रसारित करने से भी रोका जा रहा है.
एक दिन पहले बिलासपुर के ब्लॉगर दीपक पटेल जो जशपुर से हसदेव के आंदोलन को कवर करने गए थे उन्हे अदानी कंपनी के गुंडों घेरकर एक घंटे तक बंधक बनाकर रखा. उनके पूरे डाटा को डिलीट करवा दिया गया. इस प्रक्रिया में अदानी कंपनी के गुंडों का पुलिस पूरी तरह समर्थन कर रही थी.
एक पत्रकार ने बताया कि रिपोर्ट लिखने पर उसके संपादक को नोटिस भिजवाया गया. एक पत्रकार ने कहा कि हसदेव की खबर लिखने पर उसे धमकाया गया.
बता दें कि छत्तीसगढ़ का हसदेव अरण्य उत्तरी कोरबा, दक्षिणी सरगुजा और सूरजपुर जिले में स्थित एक विशाल व समृद्ध वन क्षेत्र है. जो जैव-विविधता से परिपूर्ण है. हसदेव नदी और उस पर बने मिनीमाता बांगो बांध का केचमेंट है जो जांजगीर-चाम्पा, कोरबा, बिलासपुर जिले के लोगों और खेतों की प्यास बुझाता है. यह वन क्षेत्र सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि मध्य भारत का एक समृद्ध वन है जो मध्य प्रदेश के कान्हा के जंगल, झारखंड के पलामू के जंगलों से जोड़ता है. यह हाथी जैसे 25 महत्वपूर्ण वन्य प्राणियों का रहवास और उनके आवाजाही के रास्ते का भी वन क्षेत्र है.
परसा कोल ब्लॉक का काम शुरु कर दिया गया. यह आवंटन राजस्थान सरकार को दिया गया. राजस्थान सरकार की राजस्थान राज्य विद्युत निगम लिमिटेड कंपनी ने इसका एमडीओ अडानी को दे दिया और अब अडानी की कंपनी यहां से कोल परिवहन का काम करती है. जब इस खदान को खोला गया तब केंद्र में कांग्रेस की मनमोहन सिंह सरकार थी और छत्तीसगढ़ में भाजपा की रमन सिंह की सरकार थी. इसके बाद सियासी खेल शुरु हुआ.
विष्णुदेव साय के शपथ लेते ही पेड़ कटने शुरु
वक्त गुजरा और 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई और छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनी. 13 दिसंबर को भाजपा के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शपथ ग्रहण किया. मंत्रीमंडल का गठन भी नहीं हुआ लेकिन शपथ ग्रहण के सातवें दिन ही हसदेव में पेड़ कटाई शुरु हो गई. इस बार 91 हेक्टेयर के 15307 पेड़ों की कटाई हुई. खुद को पर्यावरण प्रेमी बताने वाले भाजपा नेताओं ने चुप्पी साध ली.
खदान की नीलामी केंद्र ने की थी
कोरबा के हसदेव में कोयले का बड़ा भंडार मिला है. केंद्र सरकार ने खदान की माइनिंग के लिए निलामी कर दी. खदान की निलामी होते ही खनन कंपनी ने अपना काम शुरु कर दिया. ग्रामीणों का आरोप है कि खदान के लिए पेड़ों की इतनी बली ले ली गई कि पूरा इलाका जंगल से मैदान में तब्दील हो गया. करीब एक दशक से कोयले के भंडार को बाहर निकलाने के लिए कंपनी के लोग हसदेव का सीना छलनी कर रहे हैं. जब पेड़ों की कटाई के विरोध में आंदोलन किया तो उल्टे पुलिस बल तैनात कर दिया गया.
जंगल मे हाथी समेत 25 से ज्यादा जंगली जीव रहते हैं. हसदेव जंगल करीब 1 लाख 70 हजार हेक्टेयर में फैला है. हसदेव नदी का पानी जब स्टोर नहीं हो पाएगा तब इंसान और जंगली जीव दोनों मुश्किल में पड़ जाएंगे. हसदेव के जंगल को जैव विविधता के लिए भी जाना जाता है.
जंगल से सटे और आस पास के इलाकों में गोंड, लोहार, उरांव, पहाड़ी कोरवा जैसी आदिवासी जातियों के 10 हजार लोगों का घर है. भूगोल के जानकारी इस इस जंगल को मध्य भारत का फेफड़ा भी मानते हैं. जंगल के कटने से पर्यावरण का संतुलन तो बिगड़ेगा ही 10 हजार लोगों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा. करीब 2 हजार वर्ग किलोमीटर जो हाथी रिजर्व क्षेत्र है उस पर आफत मंडराने लगेगा. हाथियों और इंसानों के बीच टकराव की घटनाएं भी बढ़ेंगी.
किसान आंदोलन के मुखिया रहे राकेश टिकैत ने कहा कि क्या इसी दिन के लिए आदिवासी मुख्यमंत्री लोगों ने चुना. राकेश टिकैत ने वीडियो जारी करते हुए कहा कि जिस तेजी से जंगल काटे जा रहे हैं उससे आने वाले दिनों में जंगल बचेगा ही नहीं. टिकैत ने कहा कि अगर पेड़ों की कटाई नहीं रुकी तो आदिवासियों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन करेंगे.
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