कुसुम प्लांट हादसा, 50 लाख मुआवजा, सरकारी नौकरी, बच्चों के परवरिश की मांग पूरी किए बना शव लेने से परिजनो ने किया इंकार, मच रहा बवाल

Kusum plant accident, family refused to accept the dead body without fulfilling their demands of 50 lakh compensation, government job, upbringing of children, uproar ensued

कुसुम प्लांट हादसा, 50 लाख मुआवजा, सरकारी नौकरी, बच्चों के परवरिश की मांग पूरी किए बना शव लेने से परिजनो ने किया इंकार, मच रहा बवाल

मुंगेली/सरगांव : छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के सरगांव स्थित ग्राम पंचायत रामबोड़ के कुसुम स्टील प्लांट हादसे में रेस्क्यू के दौरान तीन शव मिले थे. जिनको बिलासपुर सिम्स लाया गया था. इन शवों में मृतक जयंत साहू, प्रकाश यादव और अवधेश कश्यप की पहचान की गई थी. शनिवार को परिजनों ने पोस्टमार्टम और शव लेने से इंकार किए जाने के बाद सिम्स में मुआवजा को लेकर काफी हो हंगामा हुआ.
इस हादसे से पूरे इलाके में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई. साइलो हटाने के दौरान हुए इस दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ परिवारों को बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है.
बता दें कि इस हादसे में मृतकों की संख्या चार हो गई है. मृतकों में अवधेश कश्यप पिता निखादराम कश्यप निवासी तागा जांजगीर चांपा, प्रकाश यादव पिता, परदेशी यादव निवासी अकोली बलौदाबाजार, जयंत साहू पिता काशीनाथ साहू निवासी जबड़ापारा सरकंडा बिलासपुर हैं. एक व्यक्ति घायल मनोज धृतलहरे को पूर्व में ही राहत और बचाव कार्य करते हुए अस्पताल भेजा गया था. जहां पर इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
इस मामले में हंगामे के बाद जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच कर परिजनों को समझाने की कोशिश करते रहे लेकिन कोई हल नहीं निकल सका. जबकि इस हादसे में प्रकाश यादव के शव को इनके परिजन अपने घर बलौदा बाजार ले गए. जो प्लांट प्रबंधन और जिला प्रशासन के द्वारा दिए गए मुआवजा से संतुष्ट हुए.
लेकिन वही इस हादसे में दो शव के परिजन दिए जाने वाले मुआवजा से संतुष्ट नहीं हुए. इस हादसे में दो शव जिनमें एक इंजीनियर जयंत साहू बिलासपुर और फीडर अवधेश कश्यप जांजगीर निवासी के परिजन शव को लेने से इंकार कर दिया.
उनका कहना था कि बच्चों की परवरिश और सरकारी नौकरी के साथ मांग करते हुए एक करोड़ के मुआवजा देने की बात कही. सुबह से देर शाम तक प्रशासन कोई हल नहीं निकाल पाया. वही स्टील प्लांट प्रबंधन भी इतनी बड़ी घटना सामने आने के बाद अमानवीय रुप से मुआवजा को लेकर अपना रुख को अपना रखा है. उस पर प्रशासन भी चुप्पी साधे रखा हुआ है.
वही सूत्र के हवाले से एक खबर सामने आ रही कि रविवार को हादसे में मृतकों के परिजन बड़ी तादाद में अपनी मांगों के साथ कोई बड़ा कदम उठाने वाले है.
कलेक्टर ने मुआवजे की प्रक्रिया को शीघ्र शुरु करने का वादा किया है. लेकिन परिजनों की सरकारी नौकरी और बच्चों की परवरिश की मांग पर अब तक कोई ठोस घोषणा नहीं हुई है.
यह हादसा न सिर्फ मजदूरों की सुरक्षा के प्रति प्रशासन और उद्योगों की लापरवाही को उजागर करता है. बल्कि यह भी बताता है कि श्रमिकों के जीवन की कीमत पर बड़े प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी जा रही है. सरकार और उद्योगों को सुनिश्चित करना चाहिए कि मजदूरों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जाएं और इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके.
कुसुम प्लांट हादसे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. मुआवजा और सरकारी नौकरी से परे यह घटना इस बात की तरफ इशारा करती है कि मजदूरों की सुरक्षा प्राथमिकता बननी चाहिए. प्रशासन और उद्योग प्रबंधन के लिए यह एक चेतावनी है कि विकास और प्रगति के साथ-साथ श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है.
नाम नहीं छापने की सूरत में प्लारन्ट के एक कर्मचारी ने बताया कि हमारा सेठ मैनेजर को दो करोड़ देकर रायपुर भेजा है. मैनेजर मामले को दबाने के लिए मंत्रालय और मंत्री का चक्कर काट रहा है. प्रशासन भी रायपुर के इशारे पर लगातार दबाव बना रहा है.  दस लाख मुआवजा लेने के लिए कहा रहा है.
जानकारी के मुताबिकर प्लान्ट मालिक सतीश अग्रवाल, आदित्य अग्रवाल, विशाल अग्रवाल समेत अन्य मालिक फरार है. इसके अलावा मैनेजर केड़िया का अता पता नहीं है. परिजनों ने बताया मैनेजर और मालिक रायपुर में मंत्री और मंत्रालय का चक्कर काट रहे हैं. यह भी जानकारी मिली है कि प्लान्ट मालिक ने मुंगेली जिला और पुलिस प्रशासन को मामले मेैं समझौता करवाने का ठेका दिया है. और आज इस कवायद को सिम्स में दिन भर होते देखा भी गया.
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