Manipur के CM का 21 महीने से जारी हिंसा के बाद इस्तीफा, विधानसभा का बजट सत्र रद्द, कांग्रेस का हंगामा, संबित पात्रा ने BJP विधायकों के साथ की बैठक
Manipur CM resigns after 21 months of violence, budget session of the assembly cancelled, Congress uproar, Sambit Patra holds meeting with BJP MLAs
इम्फाल : मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने रविवार को सीएम पद से इस्तीफा दे दिया. राज्यपाल अजय भल्ला को इस्तीफा सौंपते बीरेन सिंह की तस्वीर भी सामने आई है. जिसमें उनके चेहरे पर उदासी साफ देखी जा सकती है. इस दौरान ओडिशा के पुरी से बीजेपी सांसद संबित पात्रा भी उनके साथ मौजूद थे.
मिली जानकारी के मुताबिक बीरेन सिंह बीती रात चार्टर्ड फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे थे. जहां रविवार को गृह मंत्री अमित शाह के साथ उनकी मुलाकात हुई. इस मीटिंग में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूद थे. बैठक के बाद शाम को बीरेन सिंह ने राज्यपाल अजय भल्ला से मुलाकात करके अपना इस्तीफा सौंप दिया.
हालांकि इस बीच सवाल उठता है कि आखिर मणिपुर में तनावपूर्ण हालात तो काफी दिनों से बने हुए हैं. फिर बीरेन सिंह ने इतने दिनों बाद अचानक से इस्तीफे का फैसला क्यों लिया. सूत्रों के मुताबिक उनके इस्तीफे में कांग्रेस की तरफ से अविश्वास प्रस्ताव की धमकी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस को भरोसा था कि वे बीजेपी के उन विधायकों का समर्थन हासिल कर लेंगे. जो सिंह के नेतृत्व से नाखुश थे.
इस बीच मणिपुर के राज्यपाल अजय भल्ला ने केंद्र को इस बदलते हालात की जानकारी दी. बीरेन सिंह के इस्तीफे से पहले पहाड़ी जिलों में कुछ अहम प्रशासनिक बदलाव किए गए थे. जिनकी मुख्यमंत्री से स्पष्ट मंजूरी नहीं ली गई थी.
सूत्रों के मुताबिक सिंह को पार्टी के अंदर और बाहर से दबाव का सामना करना पड़ रहा था. कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव की धमकी, नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) का समर्थन वापस लेना और पार्टी के अंदरुनी विरोध ने उनके इस्तीफे की वजह बना.
कॉनराड संगमा की एनपीपी के समर्थन वापस लेने के बाद भी मणिपुर में बीजेपी के पास बहुमत था. लेकिन नेतृत्व में बदलाव चाहने वाले कुछ विधायकों के पार्टी छोड़ने की संभावना थी. अगर फ्लोर टेस्ट होता तो बीरेन सरकार पर संकट आ सकता था.
मुख्यमंत्री के इस्तीफे के साथ ही शुरु होने वाला मणिपुर विधानसभा का बजट सत्र भी रद्द कर दिया गया है. बता दें कि इसी बजट सत्र में एन बीरेन सिंह सरकार के खिलाफ कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी.
राहुल गांधी ने कहा कि सार्वजनिक दबाव, सुप्रीम कोर्ट की जांच और कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव ने सीएम बीरेन सिंह को इस्तीफे के लिए मजबूर कर दिया है. उन्होंने कहा कि करीब दो साल तक बीजेपी के सीएम बीरेन सिंह ने मणिपुर में विभाजन भड़काया और पीएम मोदी ने उन्हें मणिपुर में हिंसा, जानमाल के नुकसान और भारत के विचार के विनाश के बावजूद बने इस पद पर बना रहने दिया.
कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस 10 फरवरी को मणिपुर विधानसभा में मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिपरिषद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए पूरी तरह तैयार थी. मुख्यमंत्री को ये लग गया था कि माहौल बन रहा है और बहुमत उनके पास नहीं हैं. उन्हें लग गया था कि अविश्वास प्रस्ताव पारित होगा और उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा. इसलिए उन्होंने पहले ही इस्तीफा दे दिया. जयराम ने कहा कि एन बीरेन सिंह तो एक कठपुतली थे. गृह मंत्री अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं समझते. इस्तीफा तो उन्हें देना चाहिए. प्रधानमंत्री 20 महीने से मणिपुर क्यों नहीं गए हैं?
7 नवंबर, 2022 को मणिपुर सरकार ने एक आदेश पारित किया. जिसमें प्रस्तावित चुराचंदपुर-खौपुम संरक्षित वन से गांवों को बाहर रखा गया था. उसके बाद फरवरी 2023 में चुराचंदपुर, कांगपोकपी और टेंग्नौपाल जिलों में वनवासियों को अतिक्रमणकारी घोषित करते हुए बेदखली अभियान शुरु हुआ. इसके बाद मार्च, 2023 में मणिपुर सरकार ने तीन कुकी उग्रवादी समूहों के साथ ऑपरेशन के निलंबन समझौते से हटने का फैसला किया. इस बीच मणिपुर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को "मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने के अनुरोध पर विचार करने" का निर्देश दिया. इसके बाद 3 मई, 2023 को अखिल आदिवासी छात्र संघ मणिपुर (ATSUM) द्वारा मैतेई लोगों की ST दर्जे की मांग का विरोध करते "आदिवासी एकजुटता मार्च" निकाला गया. जहां हिंसा की शुरुआत हुई.
मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा में कम से कम 250 लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि हजारों की तादाद में लोग विस्थापित हुए हैं. हिंसा के दौरान आगजनी, बर्बरता, दंगा, हत्या और सामूहिक बलात्कार की घटनाएं भी देखी गईं. हजारों लोग बेघर हैं. हिंसा के दौरान आगजनी बर्बरता दंगा हत्या व सामूहिक बलात्कार की घटनाएं भी देखी गईं.
मैतेई-कुकी समुदाय के बीच भडक़ी हिंसा को 600 से ज्यादा दिन बीत चुके हैं. बीरेन ने बताया कि मणिपुर में मई 2023 से अक्टूबर 2023 तक गोलीबारी की 408 घटनाएं दर्ज की गई. नवंबर 2023 से अप्रैल 2024 तक 345 घटनाएं हुई. मई 2024 से अब तक 112 घटनाएं सामने आई हैं.
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