घर के आंगन में सो रही दो सगी बहनों को सांप ने डंसा, सर्पदंश से 10 माह की मासूम बच्ची की मौत, दूसरी बहन की हालत नाजुक, गांव में पसरा मातम

Two sisters sleeping in the courtyard of the house were bitten by a snake, a 10-month-old innocent girl died due to snakebite, the condition of the other sister is critical, mourning spread in the village

घर के आंगन में सो रही दो सगी बहनों को सांप ने डंसा, सर्पदंश से 10 माह की मासूम बच्ची की मौत, दूसरी बहन की हालत नाजुक, गांव में पसरा मातम

बिलासपुर : बिलासपुर के मस्तूरी थाना क्षेत्र के ग्राम भदौरा में बुधवार रात एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया। खुले आंगन में सो रही दो सगी बहनों को जहरीले करैत सांप ने काट लिया. घटना में आठ माजीने की मासूम ऋतु सूर्यवंशी की मौके पर ही मौत हो गई. जबकि उसकी बड़ी बहन तेजस्विनी उम्र 8 साल जिंदगी और मौत से जूझ रही है. उसे नाजुक हालत में सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है. यह घटना रात लगभग 1 बजे की है.
मिली जानकारी के मुताबिक परिवार के सदस्य रोज़ की तरह घर के आंगन में सो रहे थे. रात में अचानक लक्ष्मीनारायण सूर्यवंशी की दोनों बच्चियों की तबीयत बिगड़ने लगी. परिजन जब जागे तो देखा कि दोनों के शरीर पर सांप के डसने के निशान हैं. घबराए परिजन फौरन उन्हें लेकर मस्तूरी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने ऋतु को मृत घोषित कर दिया। जबकि तेजस्विनी की हालत नाजुक देखकर उसे बिलासपुर सिम्स रेफर कर दिया गया. और डॉक्टरों की निगरानी में सिम्स अस्पताल में उसका इलाज जारी है.
घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. ग्रामीणों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से अपील किया कि बरसात के इस मौसम में गांवों में सांपों की बढ़ती मौजूदगी को देखते हुए विशेष सतर्कता अभियान चलाया जाए. जागरुकता कार्यक्रम, साफ-सफाई और एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता जैसे उपायों की मांग की जा रही है. ताकि ऐसी दर्दनाक घटनाएं दोहराई न जाएं.
पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरु कर दी है. यह हादसा ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के समय की असावधानियों, खुले में सोने की मजबूरी और सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं की भयावह सच्चाई को उजागर करता है.
परिवार वालों का आरोप है की मस्तूरी स्वास्थ्य केंद्र में बच्चों को सही समय पर सांप के जहर से बचाने वाली दवा”एंटीवेनम”सीरम अगर मिल गई होती तो आज शायद बच्चों की हालत कुछ और होती आपको बताते चलें की इस दवा क़ो विषैले सांप के काटने के बाद सर्प द्वारा काटे गए ब्यक्ति के शरीर में इंजेक्ट किया जाता है ताकि जहर के असर को कम किया जा सके या उसे बेअसर किया जा सके.
मस्तूरी स्वास्थ्य केंद्र के अंदर अनगिनत गांव आते हैं मस्तूरी ग्रामीण क्षेत्र में बारिश के समय में सर्पदंश की समस्या लगातार देखने मिलती है. बावजूद इसके यहां सांप काटने से बचाने वाली दवा एंटीवेनम का ना होना एक गंभीर लापरवाही या विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशाँ लगाती है. मस्तूरी स्वास्थ्य केंद्र में दूर-दूर से लोग इलाज कराने आते हैं और ऐसे मामलों में मस्तूरी स्वास्थ्य केंद्र हीं लोगों के लिए एक इलाज का जगह है ठिकाना है लेकिन यहां भी इलाज नहीं मिलने पर लोगों को ऐसे मामलों में अपनी जान गवानी पड़ रही है. बहरहाल इस पूरे घटना के बाद भदौरा गांव में हरियाली त्यौहार की खुशियां माता में बदल गई है और चारों तरफ बच्चों की गुजर जाने की तकलीफ दर्द सभी गांव वालों को महसूस हो रहा है. मां का रो रो कर बुरा हाल है. सभी गांव वाले परिवार वालों को इस मुसीबत के वक़्त में दिलासा दें रहें हैं.
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बारिश में सांपों से कैसे बचें
घर के आसपास कचरा, लकड़ी, कबाड़ या झाड़ियां जमा न होने दें.
सभी दरारें और छेद बंद करें.
खिड़कियों-दरवाजों पर जाली लगाएं, दरवाजों के नीचे डोर स्वीप लगाएं.
घर के आसपास साफ-सफाई रखें और नालियों को ग्रिल से ढकें.
गमलों को सीधे जमीन पर न रखें, स्टैंड का इस्तेमाल करें.
जहां सांप छिप सकें, ऐसे कोनों को क्लीन रखें.
सांप काटा है या नहीं कैसे पहचानें
जलन, लालिमा और सूजन
मिचलाना, कमजोरी
पेट दर्द, दस्त
शरीर के अंगों में अकड़न या झनझनाहट
सांस लेने में दिक्कत
खून बहना या स्किन काली पड़ना
शरीर का तापमान बढ़ना
ब्लड प्रेशर लो होना और बेहोशी
सांप काटने पर फर्स्ट एड में क्या करें
पीड़ित को लिटाएं और शांत रखें
काटे गए अंग को स्थिर रखें
साबुन और पानी से साफ करें
मेडिकल हेल्प के लिए तुरंत हॉस्पिटल ले जाएं
सांप काटने के बाद क्या न करें
घाव पर चीरा न लगाएं
जहर चूसने की कोशिश न करें
टाइट बैंडेज या देसी दवा का इस्तेमाल न करें
सांप काटने पर हेल्पलाइन नंबर

अगर सांप घर में दिखे या परिवार के किसी सदस्य को काट ले तो घबराने की बजाय पहले फर्स्ट एड को अपनाएं. इसके अलावा वाइल्डलाइफ SOS हेल्पलाइन नंबर 9917109666 पर संपर्क करें. इसमें वन विभाग या लोकल स्नेक रेस्क्यू टीम आपकी हेल्प करती है.