आंबेडकर मुद्दे पर छिड़ा घमासान, भाजपा सांसदों पर लगा राहुल गांधी से मारपीट करने का आरोप, भड़की मायावती, देशव्यापी प्रदर्शन, बरसे लालू और तेजस्वी यादव

Battle erupts on Ambedkar issue, BJP MPs accused of assaulting Rahul Gandhi, Mayawati furious, nationwide protests, Lalu and Tejaswi Yadav lash out

आंबेडकर मुद्दे पर छिड़ा घमासान, भाजपा सांसदों पर लगा राहुल गांधी से मारपीट करने का आरोप, भड़की मायावती, देशव्यापी प्रदर्शन, बरसे लालू और तेजस्वी यादव

दिल्ली : संसद में केद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संविधान पर चर्चा के दौरान एक लंबे भाषण के इस छोटे से अंश को लेकर ऐसा हंगामा हो गया और संसद की कार्यवाही रोकनी पड़ी. वही इसी को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है. बुधवार को अमित शाह ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस की जिसमे उन्होंने कहा की “जिन्होंने जीवन भर बाबा साहेब का अपमान किया. उनके सिद्धांतों को दरकिनार किया. सत्ता में रहते हुए बाबा साहेब को भारत रत्न नहीं मिलने दिया. आरक्षण के सिद्धांतों की धज्जियां उड़ाई. वे लोग आज बाबा साहेब के नाम पर भ्रांति फैलाना चाहते हैं.”
अमित शाह का बयान जिस पर विवाद हुआ है, वह डॉ. भीमराव आंबेडकर की विचारधारा और उनकी पहचान को लेकर उठे सवालों पर आधारित है. डॉ. आंबेडकर को दलितों और समाज के शोषित वर्ग का रक्षक माना जाता है. वे जातिवाद, सामाजिक और आर्थिक भेदभाव के खिलाफ थे,.और उन्होंने भारतीय संविधान में समानता और न्याय के अधिकारों की नींव रखी. उनके मुताबिक शोषण और असमानता से मुक्ति के लिए भारतीय समाज को एक नए सामाजिक और राजनीतिक ढांचे की जरुरत थी.
अमित शाह के बयान को आंबेडकर का अपमान इस कारण माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने यह टिप्पणी की है कि “ईश्वर ही शोषण से मुक्ति देने वाला है,” जिससे यह साफ़ होता है कि वे आंबेडकर द्वारा किए गए संविधान सुधारों और उनके सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण को गौण कर रहे हैं. आंबेडकर ने जो शोषण मुक्त समाज का सपना देखा था. वह एक कानून और व्यवस्था की प्रक्रिया के तहत था. जो जातिवाद को खत्मकरने और समाज में समानता लाने पर केंद्रित था. ऐसे में अमित शाह का बयान यह संकेत दे सकता है कि शोषण से मुक्ति किसी ईश्वर पर निर्भर है. न कि डॉ. आंबेडकर द्वारा स्थापित संवैधानिक ढांचे पर.
डॉ. हवलदार भारती का कहना है कि आंबेडकर का प्रभाव दलित और पिछड़े वर्गों में गहरा है. और उनके विचारों से जुड़ा होना उन समुदायों के लिए सम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है. ऐसे में इस प्रकार का बयान आंबेडकर के संघर्ष और उनके संघर्षों के उद्देश्यों का अपमान करता है. दलित समुदायों के लिए आंबेडकर सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा और आंदोलन के प्रतीक हैं. जो समाज में समानता और न्याय की लड़ाई को दर्शाता है.
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भाजपा सांसदों पर लगा राहुल गांधी से मारपीट करने का आरोप

बाबा साहेब अंबेडकर के मुद्दे पर कांग्रेस के सदस्य शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा से मकर द्वार तक मार्च कर रहे थे. तभी उन्हें संसद में प्रवेश करने से शारीरिक रुप से रोका गया. इसके अलावा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ सत्ताधारी पार्टी के 3 सांसदों ने मारपीट की. यह विपक्ष के नेता को दिए गए विशेषाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है. और एक सांसद के रुप में उनके अधिकारों का हनन है. राहुल जी पर यह खुला हमला न सिर्फ उनकी गरिमा पर बल्कि हमारी संसद की लोकतांत्रिक भावना पर भी हमला है. इंडिया अलायंस के नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा व्यक्त की है और उनसे इस गंभीर मामले पर गौर करने और उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया है.

राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिका में भारतीय कारोबारी गौतम अदानी पर हुए केस के बारे में चर्चा से ध्यान भटकाने के लिए बीजेपी ये सब कर रही है. इससे पहले राहुल गांधी ने रिजिजू के आरोपों से इन्कार करते हुए कहा कि आज संसद में घुसने के समय प्रवेश द्वार के सामने बीजेपी के सांसद उनका रास्ता रोकने की कोशिश कर रहे थे.
राहुल गांधी के मुताबिक़ बीजेपी सांसदों ने उनके और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ धक्का-मुक्की की. इसी वजह से वहां हंगामा हुआ. वहीं बीजेपी के कुछ सांसद राहुल गांधी की शिकायत लेकर थाने पहुंचे और उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज कराया.

राहुल गांधी ने प्रताप सारंगी के दावों का जवाब दिया. कहा ''सच तो ये है कि आज जब संसद में घुस रहा था तो बीजेपी के सांसदों का एक ग्रुप मेरा रास्ता रोकने की कोशिश कर रहा था. मल्लिकार्जुन खड़गे को भी धक्का दिया गया. इसी वजह से वहां हंगामा हुआ.''
राहुल गांधी ने कहा, ''उन्होंने मुझे धक्का दिया. मुझे धमकी दी. लेकिन इससे हमें कोई फ़र्क नहीं पड़ता. धक्का-मुक्की से हमें डर नहीं लगता. ये संसद है और हमें इसके अंदर जाने का पूरा हक है.''
इसके बाद राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, "पार्लियामेंट से कुछ दिन पहले अदानी जी का यूएस में केस आया और पूरे टाइम बीजेपी ने उस पर डिबेट रोकने की कोशिश की. बीजेपी की बेसिक कोशिश यही थी कि इस पर चर्चा न हो.''
''उसके बाद अमित शाह जी का बयान आता है. हम पहले से कह रहे हैं कि बीजेपी-आरएसएस की सोच संविधान विरोधी और एंटी आंबेडकर है. ये लोग आंबेडकर जी को सोच को मिटाना चाहते हैं.''
उन्होंने कहा, '' गृह मंत्री ने सीधे तौर पर दिखा दिया कि इनकी मानसिकता क्या है. हमने इस मुद्दे पर (आंबेडकर पर टिप्पणी को लेकर) कहा कि बीजेपी को माफी मांगनी चाहिए. लेकिन उन्होंने वो नहीं किया. आज फिर से उन्होंने ध्यान हटाने की नई कोशिश शुरु की है.''
राहुल गांधी ने कहा,'' हम आंबेडकर जी की प्रतिमा से संसद भवन के प्रवेश द्वार की ओर जा रहे थे. लेकिन बीजेपी के सांसदों ने लकड़ियां लिए हमें बीच में रोकने की कोशिश की.''
उन्होंने कहा,'' गृह मंत्री को इस्तीफ़ा देना चाहिए. मुख्य मुद्दा यही है कि अदानी जी पर ये लोग चर्चा नहीं चाहते हैं.
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अंबेडकर मामले पर अरविंद केजरीवाल ने नीतीश कुमार को लिखी चिट्ठी, समझाया कि लोग क्या चाह रहे हैं?

पटना : गृहमंत्री अमित शाह के अंबेडकर वाले बयान को लेकर बिहार ही नहीं देश की सियासत गरमाई हुई है. विपक्ष के नेता लगातार अमित शाह के इस बयान के खिलाफ अपनी राय दे रहे हैं. वहीं इसी बीच दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू को चिट्ठी लिखकर अमित शाह के बयान के बाद सीएम नीतीश कुमार को अंबेडकर मामले पर विचार करने को कहा है.
बाबासाहेब सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि हमारे देश की आत्मा हैं. बीजेपी के इस बयान के बाद लोग चाहते हैं कि इस मसले पर आप भी गहराई से विचार करें. मैं आपको यह पत्र एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर लिख रहा हूं, जो न केवल हमारे संविधान बल्कि बाबासाहेब अम्बेडकर की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा है. हाल ही में संसद में, देश के गृह मंत्री अमित शाह जी द्वारा बाबासाहेब के नाम पर की गई टिप्पणी ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। उनका यह कहना कि “अंबेडकर-अंबेडकर  बोलना आजकल फैशन बन गया है” न केवल अपमानजनक है बल्कि बीजेपी की बाबासाहेब और हमारे संविधान के प्रति सोच को उजागर करता है. बाबासाहेब अम्बेडकर, जिन्हें कोलंबिया विश्ववि‌द्यालय ने “Doctor of Laws” से सम्मानित किया था, जिन्होंने भारत के संविधान को रचा और समाज के सबसे वंचित वर्गों को अधिकार दिलाने का सपना देखा, उनके बारे में ऐसा कहने का साहस आखिर बीजेपी ने कैसे किया? इस से देश भर में करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं. ये बयान देने के बाद अमित शाह जी ने माफ़ी मांगने की बजाय अपने बयान को उचित ठहराया. प्रधानमंत्री जी ने सार्वजनिक रूप से अमित शाह जी के बयान का समर्थन किया. इसने जले पर नमक छिड़कने का काम किया. लोगों को लगने लगा है कि बाबा साहेब को चाहने वाले अब बीजेपी का समर्थन नहीं कर सकते.
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आंबेडकर पर शाह के बयान से भड़की मायावती

बसपा प्रमुख मायावती ने इसे बाबासाहेब का अपमान बताते हुए माफी की मांग की है. साथ ही कहा कि दलित समाज में इसे लेकर काफी गुस्सा है. 
अपने बयान में बसपा चीफ मायावती ने कहा कि 'भारतीय संविधान के निर्माता और दलितों व अन्य उपेक्षित वर्गों के मसीहा डॉ. भीमराव अंबेडकर के बारे में संसद में अमित शाह के इस्तेमाल किए गए शब्दों से बाबा साहब की गरिमा और अस्तित्व को गहरी ठेस पहुंची है और एक तरह से उनका अपमान हुआ है. अब पूरे देश में उनके अनुयायियों में जबरदस्त गुस्सा और आक्रोश है और उन्हें अपने ये शब्द वापस लेने चाहिए और इसके लिए पश्चाताप भी करना चाहिए.

अपमान पर माफी मांगने की बजाय शाह का वीडियो हटाने के लिए सरकार ने ट्विटर को दिया निर्देश, अब BJP ने किया आंबेडकर का अनादर

कांग्रेस पार्टी ने बीजेपी और केंद्र सरकार पर कुछ और गंभीर आरोप लगाए हैं. सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि अमित शाह और उनकी पार्टी बीजेपी अंबेडर के अपमान के लिए माफी मांगने की बजाय उलटे ट्विटर पर इस बात का दबाव बना रहे हैं कि उस वीडियो को एक्स से हटा लिया जाए. जिसमें अमित शाह आंबेडकर का कथित तौर पर अपमान कर रहे हैं. यही नहीं कांग्रेस पार्टी ने अब बीजेपी पर अंबेडकर का अपमान करने का आरोप लगाया है.
उन्होंने कहा कि "सदन के बाबा साहेब आंबेडकर का अपमान करके गृहमंत्री अमित शाह ने अक्षम अपराध किया. अमित शाह को बचाने के लिए खुद पीएम मोदी मैदान में उतर आए. जब इससे भी बात नहीं बनी तो उन्होंने एक्स (ट्विटर) को निर्देशित किया कि उनका (अमित शाह) जो वीडियो है. वह देश के कानून का उल्लंघन करता है. उसे एक्स के प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाए. वहीं, ट्विटर ने हमें सूचित किया है कि वह इस वीडियो को नहीं हटाएगा. इससे किसी कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है."
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, "आप क्यों निर्देशित कर रहे हैं कि आपका वो वीडियो हटाया जाए? आप यह कैसे कह सकते हैं कि वह वीडियो तोड़मरोड़ कर पेश किया गया है? अमित शाह ने जो स्पीच दिया उसे हमने राज्यसभा की वेबसाइट से निकाला. जो अनएडिटेड है. पेज नंबर 344 के लास्ट पैराग्राफ में वह साफ कहते हैं कि अभी एक फैशन हो गया है आंबेडकर, आंबेडकर, आंबेडकर, इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों में स्वर्ग मिल जाता. यह शब्द विपक्ष या कांग्रेस पार्टी और उनके सांसदों ने नहीं कहे हैं. इस शब्द को देश के गृह मंत्री अमित शाह ने देश के सदन में कहे हैं."
उन्होंने आगे कहा, "आपको (अमित शाह) इस अपराध के लिए माफी मांगनी चाहिए. देश के सामने हाथ जोड़कर खड़े होना चाहिए. लेकिन बाबा साहेब का अपमान करने के बाद आप हमें डराने, धमकाने का काम कर रहे हैं. न हम आपकी गीदड़ धमकियों से डरे हैं और न डरेंगे. यह देश आपका सच जान चुका है. क्योंकि बाबा साहेब आंबेडकर का अपमान आज भले आपने किया हो. लेकिन जो भावना आपको, आपके पुर्खों ने सिखाई है. वह दिख रही है. आपके पुर्खे बाबा साहेब के पुतले जलाते थे. उन्हें घोर हिंदू विरोधी बताते थे. आपके पुर्खों ने उनके घर पर धावा बोला. उन्हें मिलकर चनाव हराया. अब आपको लगता है कि हम आपकी धमकियों से डर जाएंगे ऐसा नहीं होगा.
कांग्रेस प्रवक्ता ने आगे कहा, "उन्होंने (बीजेपी) माफी मांगने की बजाय एक बार आंबेडकर का अपमान किया. कल विपक्षा सांसदों ने बाबा साहेब आंबेडकर की तस्वीर हाथों में लिए संसद परिसर में प्रदर्शन किया था. बीजेपी के ट्विटर हैंडल ने कल रात को 10.45 बजे यह फोट डाली. जहां पर बाबा साहेब की फोटो हटा दी गई और फोटो की जगह, जिनको वो राष्ट्र विरोधी मानते हैं. जॉर्ज सोरोस की तस्वीर लगा दी. बाबा साहेब आपके लिए इतने छोटे हैं कि उन्हें हटाकर किसी की भी तस्वीर आप लगा देते हैं. इस देश के संविधान निर्माता जिन्होंने सभी को बराबरी का सम्मान दिया. उनकी तस्वीर को हटाकर उस व्यक्ति की तस्वीर को लगा देते हैं. जिसे आप राष्ट्र विरोधी बताते हैं. ओरिजनल तस्वीर के साथ खिलवाड़ करके बाबा साहब की तस्वीर को बदल कर उस व्यक्ति की तस्वीर आपने लगाई. जिसे खुद बीजेपी राष्ट्र विरोध बुलाती है. यह किस तरह की सोच है?"
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बरसे लालू और तेजस्वी यादव

पटना : संघ और भाजपा नेताओं को गोलवलकर की आनुवंशिक पीढ़ी बताते हुए राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने भीमराव आंबेडकर के प्रति केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कथित अपमानजनक बयान की कटु निंदा की. बाबा साहब को महामानव बताते हुए लालू यादव ने बुधवार को कहा कि उनके असल अनुयायी तो संघ व भाजपा के नेताओं की ओर देखते भी नहीं.
लालू प्रसाद ने कहा कि ऐसे महामानव को अपमानित करने के बाद भी अगर कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर भाजपा के साथ है तो इसका मतलब है कि वह गोलवलकर, संघ और भाजपा का पूजक व कट्टर तलवा-चाट है.
लालू ने कहा कि बंच आफ थाट्स के अनुचर कभी भी बाबा साहब के विचारों को नहीं अपना सकते. इसलिए अब वे बाबा साहब को गाली से संबोधित कर रहे. संघ और भाजपा के नेताओं की बोली-बात व भाव-भंगिमा से भी आंबेडकर के प्रति घृणा झलक रही.
सामाजिक गैर-बराबरी, असमानता, विषमता, छूआछूत, भेदभाव, घृणा को प्रश्रय देने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व भाजपा के नेताओं की संविधान, अनुसूचित जाति-जनजाति, शोषित-वंचित और उपेक्षित समाज से वैमनस्यता जगजाहिर है.
बाबा साहब को देव-तुल्य बताते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि शाह की ऐसी संकीर्ण सोच की हम निंदा करते हैं और क्षमायाचना की मांग करते हैं.
तेजस्वी ने कहा कि बाबा साहब के चाहने वालों को स्वर्ग नहीं, स्वर चाहिए.
संविधान के शिल्पकार के प्रति ऐसी घृणित सोच भाजपा और संघ की पाठशाला से ही पनपती है.
सौ करोड़ से अधिक वंचित, उपेक्षित, उत्पीड़ित, शोषित, उपहासित, अनुसूचित जाति, पिछड़े, गरीब, अल्पसंख्यक एवं समता, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, बंधुता और संविधान में विश्वास रखने वाले न्यायप्रिय लोगों के लिए बाबा साहब भगवान से कम भी नहीं हैं.
करोड़ों लोगों को नारकीय जीवन से छुटकारा दिलाकर उन्होंने उन्हें जीते-जी ही मोक्ष प्रदान कर दिया.
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देश की महामहिम राष्ट्रपति को चाहिए भारत के संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ बाबा साहब अंबेडकर का  देश की संसद में अपमान करने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को देश हित में तत्काल बर्खास्त करे -गोपाल ऋषिकर भारती
राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा भारत के राष्ट्रीय संयोजक गोपाल भारती द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री जैसे बड़े पद पर विराजमान होने वाले अमित शाह को देश की संसद में संविधान निर्माता बाबा साहब अंबेडकर को अपमानित करने तथा नीचा दिखाने वाली ओछी भाषा का प्रयोग करना बिल्कुल ही घोर आपत्तिजनक और अतिनिंदनीय मामला है.
उनके द्वारा इस तरह कहना कि अंबेडकर आंबेडकर.... शब्द एक फैशन बन चुका है अगर इतना ही भगवान का नाम लेते तो सात जन्म तक स्वर्ग मिल गया होता. अब बताइए क्या यह बाबा साहब अंबेडकर के प्रति जो दलित, शोषित, वंचित करोड़ों लोग अपनी जान तक देने के लिए बड़े जुनून के साथ उन्हें अपना भगवान ये उससे भी महापुरुष मानते हो उसे फैशन कहना कितना आपत्तिजनक और दुष्टता भरा आचरण है।अमित शाह को अनेकों जगह बनिया जाती होने की खुले रूप में बयान किया गया क्या हिन्दू धर्म व्यवस्था में बनिया जाती ब्राह्मण, क्षत्रिय के बाद थर्ड क्लास व्यापारी वर्ण माना गया जिनको राजनीति करने की पाबंदी थी.
आज बाबा साहब अंबेडकर के संविधान की वजह से उनको देश का गृह मंत्री बनने का मौका मिला. जबकि उनको तड़ीपार घोषित किया गया था. संविधान के कारण ही उनको राहत मिली. इसके लिए उन्हें सात जन्मों तक भी बाबा साहब का कर्जदार बनकर उनका शुक्रिया अदा करते रहना चाहिए था. लेकिन पद की लालसा इतनी बुरी है कि वह बर्बाद कर ही छोड़ेगी.
आर एस एस भाजपा की सरकार में रहना है तो भारत राष्ट्र,भारत के संविधान और भारत के इंसानियत के खिलाफ बोलना पड़ेगा. क्योंकि ये उल्टी खोपड़ी वाले देश को बर्बाद करने पर आमादा हो चुके हैं. इन्हीं सिरफिरों की वजह से भारत देश विदेशियों के हजारों साल तक गुलाम रहा. फिर भी इनको जरा भी लज्जा नहीं होती.
बाबा साहब अंबेडकर ने कहा था कि.. मैं हिंदुओं को यह समझा सकूं कि ओ लोग एक रुग्ण  विचार  के शिकार है जो दूसरों के लिए घातक है तो मुझे संतोष होगा..।आज जो लोग गर्व  से कहो हम हिन्दू कहते हैं उन्हें समझना होगा कि बाबा साहब अंबेडकर ने हिन्दू कोड बिल और भारत का संविधान बनाकर जिस तरह भारत की आधी शक्ति महिलाओं और सभी वर्गों को बराबरी के अधिकार दिलाकर हिन्दू समाज का  क्रांतिकारी सुधार किया वह किसी युग में उनके भगवानों और अवतारों ने भी नहीं किया।ब्राह्मण समुदाय को ही ले तो पुरानी हिन्दू वर्ण व्यवस्था में उन्हें केवल शिक्षा और पूजा पाठ  के अधिकार थे.
लेकिन आज भारत के संविधान के कारण अब ब्राह्मण  समुदाय समाज के हर क्षेत्र जिसमें राजनीति, व्यापार, फौज, न्यायालय, नौकरशाही सभी में बड़े पैमाने पर छाए हुए हैं. ऐसे में कोई भी वर्ग अगर बाबा साहब अंबेडकर को या भारत के संविधान को निचा दिखाकर अपने को ऊंचा उठाने की तो याद रहे ओ खुद ही आसमान की तरफ थूकने वाले की तरह गंदा हो जाएगा.
अमित शाह के साथ अब यही होना है समझो. इन्होंने सांप के फन से बदन को खुजलाने वाली हरकत की है. देश की महामहिम राष्ट्रपति को चाहिए कि देश को गुलाम बनाने वाले इस तरह की विकृत और गंदी मानसिकता के मंत्री को देश हित में तत्काल बर्खास्त करे.
अगर ऐसा ना किया गया तो अब देशभक्त भारतवासी अब कायर बनकर और गुलाम होने का तमाशा नहीं देखेंगे. ऐसी सरकार को ही बिना चुनाव के ही उखाड़ फेंकेंगे. समय के रहते भाजपा सरकार को चाहिए हर हाल में भारत में अराजकता को फैलाने की हिमाकत ना करे.
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गृहमंत्री अमित शाह के अंबेडकर वाले बयान पर बवाल, छग में कांग्रेसियों ने किया पुतला दहन

दुर्ग : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा संसद में बाबा साहब अंबेडकर पर दिए बयान को लेकर कांग्रेस ने देशभर में इस बयान के विरोध में प्रदर्शन किया. वहीं छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पटेल चौक पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर पर विवादित टिप्पणी के विरोध में देश के गृहमंत्री अमित शाह का पुतला दहन किया गया.
दुर्ग के पटेल चौक पर बड़ी संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता इकट्ठा हुए. यहां उन्होंने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए अमित शाह का पुतला दहन किया. वहीं कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कहा कि  बाबा साहब ने देश को संविधान दिया है. संविधान के रचयिता के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अमित शाह के खिलाफ जमकर नारेबाजी की है. उन्होंने ने कहा कि बाबा साहेब के संविधान के महत्व को नहीं मानने वाले लोग समझ भी नहीं सकते हैं. उन्होंने वंचित शोषित और समाज के आवाज देने का काम बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने किया था.
गृहमंत्री अमित शाह ने राज्य सभा में उपहासास्पद और अपमानजनक तरीके से कहा था कि अम्बेडकर का नाम लेना आजकल फैशन बन गया है. इतना भगवान का नाम लेते तो सात जन्म तक स्वर्ग मिल जाता. संविधान विरोधी संघियों को यह पता होना चाहिए कि देश के नब्बे फीसदी आदिवासी, दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और महिलाओं को जो सम्मान के साथ संवैधानिक अधिकार मिले हैं उसमें बाबा साहेब के महत्वपूर्ण योगदान है.
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