EOW ने पांच अधिकारियों को किया गिरफ्तार, दो जनरल मैनेजर के अलावा हेल्थ विभाग के डिप्टी डायरेक्टर शामिल, सात दिन की रिमांड पर भेजे गए आरोपी
EOW arrested five officers, including two general managers and the deputy director of the health department, the accused were sent on seven-day remand
रायपुर : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सीजीएमएससी के रीएजेंट खरीदी घोटाले में देर रात ईओडब्लू ने CGMSC के 5 अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया. इनमें सीजीएमएससी के दो जीएम शामिल हैं. ईओडब्लू ने हेल्थ विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. अनिल परसाई को भी गिरफ्तार किया है. इस मामले में ईओडब्लू ने सप्लायर मोक्षित कारपोरेशन के डायरेक्टर शाशांक चोपड़ा को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है.
छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र खत्म होने के बाद छत्तीसगढ़ की ईओडब्लू एक्शन में आ गई. बता दें कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन में करोड़ों के घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने ईओडब्लू ने दो आईएएस समेत सीजीएमएससी और हेल्थ विभाग के दर्जन भर अधिकारियों को तलब कर लंबी पूछताछ की थी. CGMSC के जिन अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है उनमें वसंत कौशिक, डॉ. अनिल परसाई, शिरौंद्र रावटिया, कमलकांत पाटनवार और दीपक बांधे शामिल हैं.
इस घोटाले की जड़ें काफी गहरी हैं. भारतीय लेखा एवं लेखापरीक्षा विभाग के प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल (ऑडिट) आईएएस यशवंत कुमार ने कांग्रेस शासनकाल के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा 660 करोड़ रुपये के गोल-माल की जानकारी देते हुए एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मनोज कुमार पिंगआ को एक पत्र लिखा था. इस पत्र में बताया गया है कि किस तरह से स्वास्थ्य विभाग ने राजकोष को नुकसान पहुंचाया.
लेखा परीक्षा की टीम ने CGMSC के सप्लाई दवा और उपकरणों के वित्त वर्ष 2022-24 और 2023-24 के दस्तावेजों की गहन जांच की. इस जांच में यह तथ्य सामने आया कि कंपनी ने बिना बजट आवंटन के 660 करोड़ रुपये की खरीदी की. ऑडिट में यह भी पाया गया कि पिछले दो वर्षों में जरुरत से ज्यादा केमिकल और उपकरणों की खरीद में नियमों का उल्लंघन किया गया.
प्रदेश के 776 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में बिना जरुरत के उपकरणों और रीएजेंट्स की सप्लाई की गई. इनमें से 350 से ज्यादा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ऐसे हैं, जहां तकनीकी, जनशक्ति और भंडारण सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं. ऑडिट टीम के मुताबिक DHS ने स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं के लिए बेसलाइन सर्वेक्षण और अंतर विश्लेषण किए बिना ही उपकरणों और रीएजेंट की मांग पत्र जारी किया था.
इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के बीच गहरी साजिश का पर्दाफाश हुआ है. जो प्रदेश के स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर रहा है. अब देखना यह होगा कि ईओडब्ल्यू इस मामले में आगे की कार्रवाई कैसे करती है और दोषियों को सजा दिलाने में कितनी कामयाब होती है.
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