लंबे समय तक गैरहाजिर कर्मचारी सेवा से बर्खास्त, कलेक्टर ने पर्यवेक्षक को किया सस्पेंड, बीएमओ समेत 7 डॉक्टरों को संभागायुक्त ने थमाया शो काज नोटिस
Employee absent for a long time dismissed from service Collector suspended supervisor Divisional Commissioner served show cause notice to 7 doctors including BMO
गरियाबंद/राजिम : राज्य शासन द्वारा शासकीय सेवकों को उनके कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन सुनिश्चित करवाने अनाधिकृत रुप से गैरहाजिर शासकीय सेवकों पर नियमानुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिये गये हैं. उक्त निर्देशानुसार कलेक्टर दीपक अग्रवाल ने भी जिला अधिकारियों को शासन के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं. साथ ही अनाधिकृत रुप से गैरहाजिर अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्यवाही भी करने के निर्देश दिये गए.
पीडब्ल्यूडी कार्यालय राजिम में पदस्थ अकुशल श्रमिक बुधारु राम को लंबे समय से अनाधिकृत रुप से गैरहाजिर रहने की वजह से अधीक्षण अभियंता लोक निर्माण विभाग रायपुर द्वारा सेवा से हटाए गए हैं. अनुपस्थिति अवधि में उनके खिलाफ विभागीय जांच संस्थित की गई. विभागीय जांच मामले में अनाधिकृत रुप से अनुपस्थिति और स्पष्टीकरण पत्र का जवाब पेश नहीं करने का आरोप अधिरोपित किया गया. उन्हें अपना जवाब पेश करने का पर्याप्त मौका दिया गया. इसके बावजूद कर्मचारी द्वारा न ही जवाब पेश किया गया और न ही अपने कर्तव्य पर हाजिर हुए. जांच मामले में अधिरोपित आरोप पूरी सत्य सिद्ध पाया गया. आरोप सिद्ध होने पर उक्त कर्मचारी को सेवा से निष्कासित किया गया है.
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कलेक्टर ने किया पर्यवेक्षक को निलंबित
जांजगीर-चांपा : कलेक्टर आकाश छिकारा के द्वारा वजन त्यौहार 2024 कार्यक्रम अंतर्गत आंगनबाड़ी केन्द्र का निरीक्षण किया गया. निरीक्षण के दौरान एकीकृत बाल विकास परियोजना पामगढ़ जिला जांजगीर-चांपा के ऑगनबाड़ी केन्द्र राहौद क्रमांक 8 में वजन त्यौहार का कोई भी तैयारी परिलक्षित नही हुआ.
अनुपमा अग्रवाल पर्यवेक्षक सेक्टर राहौद परियोजना पामगढ़ के द्वारा बताए अनुसार ऑगनबाड़ी केन्द्र में 0 से 6 साल के 69 बच्चे हैं. 69 बच्चें में 11 बच्चों का आज तक वजन नही लिया गया है. अनुपमा अग्रवाल पर्यवेक्षक ऑगनबाड़ी केन्द्र राहौद क्रमांक 8 में वजन त्यौहार कार्यक्रम पूरा हो चुका है.
पर्यवेक्षक से जानकारी मांगे जाने पर माह अगस्त 2024 में वजन ले लिया गया है. रजिस्टर का अवलोकन कराकर गुमराह किया गया और पर्यवेक्षक के दायित्वों के मुताबिक काम नही किया गया. अनुपमा अग्रवाल पर्यवेक्षक को इस बारे में कारण बताओ सूचना पत्र जारी का स्पष्टीकरण मांगा गया था. लेकिन संबंधित का जवाब संतोषप्रद नही पाया गया.
जो सिविल सेवा आचरण नियम 1966 के नियम 3 का खुला उल्लंघन है. कलेक्टर द्वारा अनुपमा अग्रवाल पर्यवेक्षक को निलंबित किया गया. निलंबन अवधि में अनुपमा अग्रवाल, पर्यवेक्षक, का मुख्यालय कार्यालय परियोजना अधिकारी एकीेकृत बाल विकास परियोजना बम्हनीडीह जिला जांजगीर-चांपा नियत किया गया. नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी.
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बीएमओ समेत 7 डॉक्टरों को संभागायुक्त ने थमाया शो काज नोटिस
बिलासपुर : संभागायुक्त डॉ. महादेव कावरे ने कोटा के बीएमओ डॉ. एन गुप्ता सहित 7 डॉक्टरों को शो काज़ नोटिस जारी किया. उनके गत 21 तारीख को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण के दौरान ये सभी डॉक्टर ड्यूटी से गायब मिले थे. उनसे पत्र प्राप्ति के 5 दिनों में सीएमएचओ के जरिए जवाब तलब किया गया. जिन चिकित्सकों को नोटिस जारी किया गया. उनमें बीएमओ डॉ.एन गुप्ता सहित चिकित्सा अधिकारी डॉ. ए साय,डॉ. पी जोगी, डॉ. आर सैमुअल, डॉ ए झा, डॉ आर तिवारी और डॉ एस पुनिया शामिल हैं.
कमिश्नर द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि वर्तमान में कोटा विकास खण्ड के कई ग्रामों में डायरिया-मलेरिया और डेंगू के सम्पेक्टेड मरीजों की बढ़ती तादाद एवं मौसमी बीमारियों की रोकथाम, उनके बेहतर स्वास्थ्य और इलाज के लिए प्रशासन द्वारा हर सम्भव प्रयासरत है.
इसी कड़ी में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कोटा के निरीक्षण के दौरान आप कार्यालयीन समय में अपने कर्तव्य पर उपस्थित नहीं पाये गए. उपस्थिति पंजी का अवलोकन करने पर पंजी में आपका दस्तखत भी नहीं पाया गया. साथ ही आपकी गैरहाजिरी के बारे में केन्द्र से कोई यथोचित सूचना भी नहीं मिली. आपकी गैरहाजिरी से मरीजों के सुचारु और बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से उन्हें स्वास्थ्यगत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. जो आपके पदीय कर्तव्यों के प्रति लापरवाही का सूचक है.
आपका उपरोक्त कृत छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 के विपरीत होने से छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत दण्डनीय है। अतः आप कारण बतायें कि उपरोक्त कृत्य के लिए क्यों न आपके खिलाफ छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत् अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरु किया जाए. आप अपना समाधान कारक जवाब पत्र प्राप्ति के 5 दिन के भीतर इस कार्यालय को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बिलासपुर के जरिए पेश करें. नियत समय पर जवाब न मिलने पर यह माना जाएगा कि इस बारे में आपको कुछ नहीं कहना है और तदनुसार एक तरफा कार्यवाही की जाएगी.
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