59 लाख की ऑनलाइन साइबर ठगी का खुलासा, पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी, मास्टर माइंड सॉफ्टवेयर इंजीनियर समेत 4 गिरफ्तार
Online cyber fraud of 59 lakhs exposed, police got a big success, 4 arrested including master mind software engineer
बिलासपुर : ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच रेंज साइबर थाना बिलासपुर को बड़ी कामयाबी मिली है. पुलिस ने तकनीकी सबुतों के आधार पर एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है. जो आम लोगों को फर्जी निवेश और गोल्ड ट्रेडिंग का झांसा देकर लाखों रुपए की ठगी कर रहा था. पुलिस ने इंदौर से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पकड़े गए आरोपियों में मुख्य आरोपी सॉफ्टवेयर इंजीनियर है. जिसने एनआईआईटी दिल्ली से पढ़ाई की है.
मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी खुद को गणेशम सिक्योरिटी नामक फर्जी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को शेयर मार्केट और गोल्ड ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा कमाने का लालच देते थे. नकली वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन बनाकर निवेश के नाम पर लाखों रुपए जमा करवाते और शुरुआती दिनों में फर्जी लाभ दिखाकर पीड़ितों का भरोसा जीत लेते थे. बाद में मोबाइल सिम और एटीएम कार्ड बदलकर गायब हो जाते थे.
सिविल लाइन थाने में बिलासपुर निवासी प्रार्थिया अल्पना जैन ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपियों ने डिमेट अकाउंट खोलकर शेयर मार्केट और ट्रेडिंग में बेहतर मुनाफा दिलाने का झांसा दिया. भरोसा जीतने के बाद अलग-अलग तारीख में कई बैंक खातों से 59.87 लाख रुपये जमा करा लिए. शिकायत को गंभीरता से लेते हुए रेंज साइबर थाना बिलासपुर की टीम ने जांच शुरु की.
मुख्य आरोपी ललीत कुमार सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और ऑनलाइन शॉपिंग साइट में मैनेजर रह चुका है. उसने अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी वेबसाइट और मोबाइल एप्लीकेशन तैयार की और “गणेशम सिक्यूरिटी” नामक नकली एजेंसी के जरिए निवेशकों को गोल्ड व ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का लालच देकर फंसाता था. पहले फर्जी लाभांश दिखाकर लोगों का भरोसा जीतता और फिर बड़ी रकम ठग लेता था.
आरोपी महू और राउ क्षेत्र के लोगों से कमिशन पर बैंक खाते लेते थे. ताकि ठगी की रकम ट्रांसफर की जा सके. काम पूरा होते ही मोबाइल सिम और एटीएम कार्ड नष्ट कर दिए जाते थे ताकि पुलिस की पकड़ में न आएं.
रेंज साइबर थाना निरीक्षक रविशंकर तिवारी के नेतृत्व में बनी विशेष टीम ने लगातार तीन दिन तक दबिश देकर सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया. उनके कब्जे से 4 मोबाइल, 7 एटीएम कार्ड, एक यूपीआई कार्ड, 2 पैन कार्ड, एक चेकबुक और 2 पासबुक जब्त की गईं.
सभी आरोपियों को न्यायालय से ट्रांजिट रिमांड में बिलासपुर लाकर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है. यह कार्रवाई बिलासपुर रेंज के आईजी डॉ. संजीव शुक्ला और एसएसपी रजनेश सिंह के मार्गदर्शन में की गई.
डॉ. संजीव शुक्ला पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन में गठित विशेष टीम ने आरोपियों की गतिविधियों पर 3 दिन तक महू (म.प्र.) में निगरानी रखी और फिर दबिश देकर चारों को गिरफ्तार किया.
इस कार्रवाई में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर राजेन्द्र जायसवाल, एएसपी ग्रामीण अनुज कुमार, सीएसपी निमितेश सिंह के मार्गदर्शन तथा निरीक्षक राजेश मिश्रा, रविशंकर तिवारी व उनकी टीम का विशेष योगदान रहा.
पुलिस प्रशासन ने साफ कहा है कि ऑनलाइन निवेश या ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता की अच्छी तरह जांच करें.
किसी भी अज्ञात लिंक, ऐप या वेबसाइट पर बैंक डिटेल / ओटीपी / पासवर्ड साझा न करें.
ज्यादा मुनाफे का लालच अक्सर ठगी का संकेत होता है.
संदेहास्पद कॉल या संदेश मिलने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाने से संपर्क करें.
गिरफ्तार आरोपी
ललित कुमार पिता सुरेंद्र सिंह उम्र 32 साल निवासी धारनाका महू, जिला इंदौर – एनआईआईटी दिल्ली से पढ़ा. सॉफ्टवेयर इंजीनियर, गिरोह का मास्टरमाइंड
बबलू उर्फ कमलजीत सिंह चौहान पिता दिलावर सिंह चौहान उम्र 38 साल निवासी अयोध्यापुरी कॉलोनी महू, जिला इंदौर
अर्पित साल्वे पिता संतोश साल्वे उम्र 30 साल निवासी गिरनार सिटी फेस-1, महू, जिला इंदौर
रोहित निषाद पिता बहादुर निषाद उम्र 25 साल निवासी शिवनगर कॉलोनी महू, जिला इंदौर
जप्त सामान..
4 मोबाइल फोन
7 एटीएम कार्ड..
1 यूपीआई कार्ड
2 पैन कार्ड
1 चेकबुक
2 पासबुक
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