रेलवे स्टेशन में बवाल, मुख्य वाणिज्य निरीक्षक से इंजीनियर और ठेकेदारों ने मारपीट कर दी हत्या की धमकी, कर्मचारियों की सुरक्षा पर उठे सवाल
Ruckus at railway station, engineer and contractors beat up Chief Commercial Inspector and threatened to kill him, questions raised on security of employees
रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी में रायपुर रेलवे स्टेशन पर एक सनसनीखेज घटना ने रेलवे कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रेलवे के मुख्य वाणिज्य निरीक्षक (सीसीआई) ठाकुर नाग ने रेलवे इंजीनियर हीरा लाल और दो ठेकेदारों, अविनाश और उपेंद्र कुमार सिंह पर गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है. इस मामले में जीआरपी रायपुर थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरु कर दी है.
मिली जानकारी के मुताबिक गुरुवार 3 जुलाई को दोपहर 12:20 बजे ठाकुर नाग अपने कार्यालय में मौजूद थे. इसी दौरान रेलवे इंजीनियर हीरा लाल, ठेकेदार अविनाश और उपेंद्र कुमार सिंह उनके कार्यालय में पहुंचे। तीनों ने गुढ़ियारी के पुराने बुकिंग कार्यालय की चाबी मांगी तो ठाकुर नाग ने पूछा कि आपको चाबी क्यों चाहिए। यह सुनकर तीनों अचानक उग्र हो गए और दुर्व्यवहार शुरु कर दिया।
शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने ठाकुर नाग को गालियां दीं, उनके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी, इस दौरान कार्यालय में मौजूद अन्य कर्मचारी मुख्य टिकट निरीक्षक बीसी आल्दा, उप स्टेशन अधीक्षक (वाणिज्य) सतेन्द्र सिंह और एमएसटी अजीत कुमार ने बीच-बचाव करने की कोशिश की. हालांकि इसके बावजूद आरोपी धमकी देकर वहां से चले गए.
ठाकुर नाग की लिखित शिकायत पर जीआरपी रायपुर ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया. जीआरपी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है. पुलिस ने यह भी आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने रायपुर रेलवे स्टेशन पर कर्मचारियों की सुरक्षा और ठेकेदारों के प्रभाव को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं.
रायपुर रेलवे स्टेशन से रोजाना हजारों यात्रियों का आना-जाना होता है. वहां कर्मचारियों के साथ इस तरह की हिंसक घटना चिंताजनक है. ठाकुर नाग के साथ हुई इस घटना ने रेलवे प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं. आखिरकार ठेकेदारों और रेलवे के कुछ कर्मचारियों के बीच ऐसी दबंगई कैसे बढ़ रही है? क्या रेलवे प्रशासन ठेकेदारों के प्रभाव को नियंत्रित करने में असमर्थ है? यह घटना रेलवे स्टेशन पर कार्यरत कर्मचारियों के मनोबल को भी प्रभावित कर सकती है.
इस घटना के बाद रेलवे कर्मचारियों में आक्रोश देखा जा रहा है. कई कर्मचारियों का कहना है कि ठेकेदारों का दबदबा और रेलवे के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत ऐसी घटनाओं को बढ़ावा दे रही है. कर्मचारियों ने मांग किया कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए. वहीं, रेलवे प्रशासन ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. जिससे कर्मचारियों में नाराजगी और बढ़ रही है.
जीआरपी की जांच अब इस मामले में निर्णायक होगी। पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि जांच न सिर्फ निष्पक्ष हो, बल्कि जल्द भी हो. ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके. साथ ही रेलवे प्रशासन को भी इस घटना को गंभीरता से लेते हुए ठेकेदारों के प्रभाव को नियंत्रित करने और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। इस घटना ने एक बार फिर रेलवे स्टेशन पर ठेकेदारों की दबंगई और कर्मचारियों की असुरक्षा को उजागर किया है. अब यह देखना बाकी है कि रेलवे प्रशासन और जीआरपी इस मामले में कितनी सख्ती और पारदर्शिता दिखाते हैं.
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