प्यार करने की दी शर्मनाक सजा, शादी के बाद प्रेमी जोड़े से जानवरों जैसा बर्ताव, दोनों को हल से बांधकर खेत जुतवाया, वीडियो वायरल

Shameful punishment for falling in love, after marriage the lovers were treated like animals, both were tied to a plough and made to plough the field, video went viral

प्यार करने की दी शर्मनाक सजा, शादी के बाद प्रेमी जोड़े से जानवरों जैसा बर्ताव, दोनों को हल से बांधकर खेत जुतवाया, वीडियो वायरल

गरियाबंद : गरियाबंद जब प्यार रिश्तों की दहलीज़ पार करता है, तो क्या सज़ा जरुरी हो जाती है? ओडिशा के रायगढ़ा जिले के कंजमाझीरा गांव में ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां दो लोगों ने अपनी मर्जी से शादी की. लेकिन उनका रिश्ता समाज के सांचे में फीट नहीं बैठा. युवक, युवती का बुआ का बेटा था. यानि कुछ लोगों की नजर में यह खून का रिश्ता था. मगर दोनों के दिलों में यह एक जीवनसाथी का रिश्ता बन चुका था.
इंसानियत को शर्मसार करने वाले एक मामले में एक प्रेमी जोड़े को सजा देने में हैवानियत की हदें पार कर दी गईं. युवक और युवती को जानवरों की तरह हल से बांधा गया और खेत जुतवाया गया. इस दौरान डंडे से उनकी पिटाई भी की गई. इतने से मन नहीं भरा तो बाद में मंदिर में ले जाकर उनका शुद्धिकरण कराया गया. डियो में गांववाले दोनों से बैल की तरह हल जुतवाते और छड़ी मारते दिख रहे हैं.

गांव वालों के लिए यह रिश्ता इतना नामंजूर था कि उन्होंने न सिर्फ प्रेमी जोड़े को बेइज्जत किया. बल्कि बैल की तरह बांधकर खेत में जोत दिया. ये न सिर्फ इंसानियत को शर्मसार करता है. बल्कि रिश्तों की पवित्रता का भी मजाक बनाता है. कभी जो रिश्ते संबल बनते हैं. वही जब बंधन बना दिए जाएं. तो प्रेम का क्या कसूर?
गांव के लोग मानते हैं कि बुआ के बेटे-बहन के बेटी का रिश्ता पवित्र है. और उसमें विवाह वर्जित.. मगर क्या यह फैसला सिर्फ ‘परंपरा’ के नाम पर लिया जा सकता है? क्या दो बालिग लोगों की सहमति पर समाज की मोहर नहीं लग सकती?
पंचायत ने न सिर्फ इन्हें खेतों में जोता. बल्कि गांव के मंदिर में ले जाकर शुद्धिकरण अनुष्ठान कराया गया. जैसे कि इनका प्यार कोई जुर्म हो. घटना का वीडियो वायरल हुआ तो प्रशासन को होश आया और पुलिस गांव पहुंची.
गांव की यह सोच बता रही है कि प्यार अब भी रिश्तों की बंदिशों में घुट रहा है. जहां आज की दुनिया में रिश्ते सहमति और समझ से बनते हैं. वहीं कुछ जगहें अब भी खून के रिश्ते और परंपरा के नाम पर दिलों की सजा तय कर रही हैं.
जब दो लोग मिलकर एक नई जिंदगी शुरू करना चाहते हैं. तो क्या समाज को यह अधिकार है कि वह उन्हें बैल बनाकर खेतों में उतारे? क्यों हमारे समाज में रिश्तों को इंसानियत से नहीं. सिर्फ परंपरा की चश्मे से देखा जाता है. वीडियो सामने आने के बाद मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने रोष जताया है.
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