सुशासन तिहार में पीड़ित ने लगाए लगाया गंभीर आरोप, कहा- 60 साल से कब्जे वाली जमीन को वन विभाग कह रहा कोई कब्जा ही नहीं, मांग रहे रिश्वत
The victim made serious allegations in Sushasan Tihar, said- Forest department is saying that there is no possession of the land which has been occupied for 60 years, and is demanding bribe
सुरजपुर : कौन सही कौन गलत वाला अब सवाल खड़ा हो गया है. जहां एक तरफ सुशासन तिहार पर एक व्यक्ति वन भूमि पर कब्ज़ा बता रहा है और उसी जमीन पर कई सालों से खेती कर रहा है और वही वन विभाग कज मानने से इंकार कर रहा है. जिसकी शिकायत पीड़ित ने सुशासन तिहार में करते हुए कहा कि कागज बनाने के लिए विभाग पैसे मांग रहा है.
वही सुशासन तिहाडर में इस आवेदन के आने के बाद वन परीक्षित अधिकारी रामानुजनगर ने सुशासन तिहर 2025 में मिले आवेदन पर निराकरण करते हुए कहा कि हमने जांच करवाया है जिसमें जनप्रतिनिधि व पंच मौके पर मौजूद थे. वन भूमि पर कुछ अज्ञात व्यक्ति जमीन पर कब्ज़ा के मकसद से बेशरम की झाडि़यां की कटाई सफाई धीरे-धीरे कर रहे हैं. जिस पर रक्षक द्वारा पूर्व में ही गस्ती कर नियंत्रण किया गया था. इस साल उक्त स्थान पर मनरेगा योजना से स्वीकृत कंटूर ट्रेंच का खुदाई कराया जा चुका है. उस स्थान पर किसी भी तरह का जोत कोड नहीं किया गया है. जंगल की अवैध कटाई पाया गया है. भविष्य में किसी भी व्यक्ति द्वारा वन अपराध करते पाए जाने पर उचित कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है.
इस निराकरण को देखकर पीडि़त ने अपनी नाराजगी व्यक्त की और दोबारा से आरोप लगाते हुए कलेक्टर सूरजपुर को शिकायत की है कि निराकरण गलत तरीके से किया गया है और जानकारी भी गलत दी गई है.
आदिवासी परिवारों के अधिकारों का हनन
सुशासन तिहार 2025 के तहत युवध सिंह ने अपनी दादी के लिए आवेदन (क्रमांक-25143282700010) दायर किया था. लेकिन उनका दावा है कि वन विभाग ने गलत स्थान की रिपोर्ट अपलोड कर मामले का निराकरण कर दिया. उन्होंने इसे सुशासन तिहार की भावना के खिलाफ और शासन की कल्याणकारी योजनाओं की धज्जियां उड़ाने वाला कृत्य बताया. आवेदन के साथ 12 फोटो और अन्य सबूत भी संलग्न किए गए हैं. जो सुखमनिया सिंह के कब्जे वाली जमीन को दर्शाते हैं.
युवध सिंह ने स्थानीय स्तर पर कार्यरत बिट गार्ड कृपा शंकर पांडे जैसे कर्मचारियों को जांच से हटाने की मांग की है. उनका कहना है कि स्थानीय कर्मचारियों की मिलीभगत की वजह से आदिवासी परिवारों के अधिकारों का हनन हो रहा है. उन्होंने कलेक्टर से अनुरोध किया है कि किसी बाहरी और निष्पक्ष अधिकारी द्वारा जांच कराई जाए. जिसमें युवध सिंह और अन्य प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए. उन्होंने जांच की तारीख की पूर्व सूचना देने की भी मांग की है.
वन भूमि अधिकारों के हनन
सूरजपुर जिले के रामानुजनगर तहसील के ग्राम नकना निवासी युवध सिंह ने अपनी दादी सुखमनिया सिंह के वन भूमि अधिकारों के हनन और सुशासन तिहार 2025 के तहत दायर आवेदन में गलत निराकरण का गंभीर आरोप लगाया है, युवध सिंह ने सूरजपुर कलेक्टर को सौंपे आवेदन में वन विभाग के अधिकारियों पर लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उचित जांच और अपनी दादी को वन अधिकार पत्रक, पट्टा व कजानामा प्रदान करने की मांग की है। युवध सिंह के अनुसार, उनकी दादी सुखमनिया सिंह के पति स्वर्गीय हृदय लाल सिंह पिछले 60 साल से ग्राम नकना में वन भूमि पर खेती करते आ रहे थे. उनकी मौत के बाद सुखमनिया सिंह ने करीब 4-5 एकड़ जमीन पर कब्ज़ा और खेती जारी रखी. इस जमीन पर उनका मकान, बाड़ी और कोठार भी मौजूद है. सुखमनिया सिंह एक अनपढ़ आदिवासी महिला है. उनके अधिकारों के अभाव में कोई दस्तावेज नहीं मिल सका.
युवध सिंह ने बताया कि उनकी दादी की जमीन की जांच वन विभाग के अधिकारियों द्वारा नहीं की गई. जिसकी वजह से उनके अधिकारों का हनन हो रहा है. आवेदन में युवध सिंह ने वन विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
उन्होंने बताया कि पूर्व में सुखमनिया सिंह को वन भूमि पर खेती करने के लिए वन विभाग, रामानुजनगर द्वारा जुर्माना लगाने के लिए बुलाया गया था. इस दौरान अधिकारियों ने उनसे पहले पैसे जमा करने की मांग की. लेकिन जब युवध सिंह ने लिखित रसीद और जुर्माना राशि का विवरण मांगा. तो अधिकारियों ने गुस्से में रसीद देने से इंकार कर दिया. युवध सिंह ने इस घटना को भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण बताया.
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