नई विधानसभा से मिनी माता का नाम हटाने पर नाराज होकर पीएम मोदी के कार्यक्रम में काले कपड़े पहनकर जा रहे अमित जोगी नजरबंद
Amit Jogi, who was wearing black clothes while attending PM Modi's programme, was put under house arrest after being upset over the removal of Mini Mata's name from the new assembly.
रायपुर : छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस और नए विधानसभा भवन के उद्घाटन से पहले जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (J) के अध्यक्ष अमित जोगी को रायपुर सिविल लाइन में हाउस अरेस्ट कर लिया गया. जिसके बाद अमित जोगी ने अपने सिविल लाइन स्थित आवास में ही काले कपड़े पहनकर विरोध-धरना शुरु किया.आपको बता दें कि अमित जोगी छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे हैं.
सिविल लाइन आवास में पहरा
रायपुर में शनिवार सुबह से ही सिविल लाइन स्थित अमित जोगी के घर के बाहर पुलिस का पहरा लगा दिया गया था. जानकारी के अनुसार, उन्हें नए विधानसभा भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में विरोध की आशंका के कारण नजरबंद किया गया. जब अमित जोगी को घर से बाहर नहीं जाने दिया गया तो वो अपने आवास में ही अपने समर्थकों के साथ काले कपड़े पहनकर बैठ गए. इस दौरान अमित जोगी ने समर्थकों के साथ घर में ही काले कपड़े पहनकर विरोध प्रदर्शन किया. इसके बाद राज्य स्थापना दिवस पर प्रतीकात्मक रुप से मिठाई बांटी.
निमंत्रण पत्र जलाकर जताया था विरोध
गौरतलब है कि जोगी ने इससे पहले विधानसभा उद्घाटन के निमंत्रण पत्र को जलाकर विरोध जताया था. उन्होंने नेता प्रतिपक्ष सहित सभी विधायकों और मंत्रियों से भी कार्यक्रम के बहिष्कार की अपील की थी. जोगी ने ये भी ऐलान किया था कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विधानसभा उद्घाटन के बाद झंडा फहराएंगे. तो वे भी झंडा दिखाकर विरोध करेंगे.
अपने पोस्ट में अमित जोगी ने लिखा, छत्तीसगढ़ के 25वें स्थापना दिवस पर आपके "उत्सव" में काले कपड़े पहनना अब "अपराध" बन गया है! मुझे अपने ही घर में नजरबंद कर दिया गया. क्योंकि मैं मिनी माता के नाम को मिटाए जाने के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध करना चाहता था. क्या लोकतंत्र इतना डरा हुआ है कि काले कपड़ों से भी घबरा रहा है? यही है आपका "अमृत काल"?
अमित जोगी ने बताया कि उन्होंने सरकार से नए विधानसभा भवन का नाम “मिनी माता भवन” रखने की मांग की थी और इसके लिए तय की गई अंतिम अवधि खत्म हो चुकी थी. इस बारे में वे आज शांतिपूर्ण प्रतीकात्मक विरोध करने वाले थे. जोगी ने कहा कि जब उन्होंने नजरबंदी का कारण पूछा तो पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उन्हें “सरकार के निर्देश” मिले हैं और किसी भी व्यक्ति को काले कपड़े पहनने की अनुमति नहीं है.
जोगी ने कहा, “हम किसी भी अप्रिय स्थिति से बचना चाहते थे, इसलिए हमने आज घर पर ही प्रार्थना और उपवास का फैसला लिया है. हम ईश्वर से यही प्रार्थना करते हैं कि सत्ता में बैठे लोगों को विरोध की आवाज़ सुनने का साहस मिले. न कि उन्हें दबाने का.”
स्थापना दिवस के मौके पर उन्होंने अपने घर भेजे गए करीब 30 पुलिसकर्मियों को मिठाई खिलाकर स्वागत भी किया. उन्होंने कहा, “यह कोई राजनीतिक नहीं बल्कि नैतिक विरोध है. छत्तीसगढ़ की आत्मा के लिए संघर्ष है. लोकतंत्र में काले कपड़े पहनना अपराध बना दिया गया है. जो दुर्भाग्यपूर्ण है.”
जोगी ने इसे संवैधानिक अधिकारों पर प्रहार बताया और कहा कि “बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान में शांतिपूर्वक विरोध करने का अधिकार पवित्र है. सरकार को चाहिए कि वह जनता की आवाज सुने, उसे कुचले नहीं.”
इस घटना ने राज्य में लोकतांत्रिक मूल्यों और असहमति के अधिकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, यह कार्रवाई विपक्ष के शांतिपूर्ण विरोध पर सरकार की असहिष्णुता को दर्शाती है.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb?mode=ac_t



