इंसानियत की मिसाल : नजाकत अली ने बचाई चिरमिरी के 11 लोगों की जान, भाजपा नेता ने जताया आभार बोले- जिंदगी भर नहीं चुका पाऊंगा एहसान

An example of humanity: Nazakat Ali saved the lives of 11 people of Chirmiri, BJP leader expressed gratitude and said- I will not be able to repay the favor in my entire life

इंसानियत की मिसाल : नजाकत अली ने बचाई चिरमिरी के 11 लोगों की जान, भाजपा नेता ने जताया आभार बोले- जिंदगी भर नहीं चुका पाऊंगा एहसान

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर : जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकियों ने 28 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी. मृतकों में ज्यादातर पर्यटक थे. इस हमले की दुनियाभर में निंदा हो रही है. पर्यटकों पर हुए हमले के बाद आतंकियों के मजहब को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. कुछ कट्टरपंथी लोग भारत और दुनिया के मुसलमानों को बुरा भला कह रहे हैं. लेकिन इन सबको वही सैलानी जवाब दे रहे हैं. जिन्होंने इस खौफनाक मंजर को देखा था. पीड़ित सैलानी मुस्लिम शख्स नजाकत अली की तारीफ करते हुए उनका आभार व्यक्त कर रहे हैं.
छत्तीसगढ़ में चिरमिरी के 4 परिवारों के 11 सदस्य जम्मू-कश्मीर घूमने गए थे. इसी बीच मंगलवार को आतंकियों ने वहां मौजूद 27 पर्यटकों पर फायरिंग कर दी. इस हमले के दौरान चिरमिरी के भी चार परिवार उसी इलाके में मौजूद थे.
स्थानीय नागरिक नजाकत अली ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए अपनी जान की बाजी लगाकर उनकी मदद की और उनकी जान बचाई. यही वजह है कि सभी पर्यटक सुरक्षित हैं.
अरविंद एस अग्रवाल छत्तीसगढ़ के चिरमिरी से हैं. वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हैं. जब आतंकियों ने पर्यटकों पर हमला किया. उस समय अरविंद अपने परिवार के साथ पहलगाम में थे. इस दौरान जब आतंकी हमला हुआ तो जम्मू-कश्मीर के स्थानीय कपड़ा व्यवसायी नजाकत अली ने अपनी जान जोखिम में डालकर अरविंद समेत कुल 11 लोगों की जान बचाई.
बीजेपी नेता अरविंद एस अग्रवाल ने उनका आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मैं उनका एहसान जिंदगी भर नहीं चुका पाऊंगा. उन्होंने अपनी जान पर खेलकर मेरे परिवार के 11 लोगों की जान बचाई.
इसी दौरान पहलगाम के रहने वाले सैयद आदिल हुसैन खच्चर पर सैलानियों को सैर करा रहे थे. आतंकियों ने जब उन सैलानियों को मारने की कोशिश की तो आदिल निहत्था आतंकियों से भिड़ गया.
आदिल हुसैन ने कहा कि तुम लोग बेकसूर सैलानियों को क्यों मार रहे हो. इसके बाद आतंकियों ने आदिल को लात मारकर नीचे गिरा दिया. वह फिर उनसे लड़ने की कोशिश करता रहा, तभी पीछे से दूसरे आतंकी ने आदिल को तीन गोलियां मार दी और उसके मौके पर ही मौत हो गई. वहीं, दूसरी तरफ आदिल हुसैन का भांजा नजाकत अली भी सैलानियों को बचाने की कोशिश कर रहा था. 
इस मुस्लिम युवक ने अपनी जान की फिक्र भी नहीं की. बताया जा रहा है कि नजाकत अली के सामने ही उसके मामा आदिल हुसैन को गोली मारी गई थी. फिर भी वह आतंकियों से नहीं डरा और सैलानियों की जान बचाने के लिए अपनी जान भी जोखिम में डाल दी.
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