बस को मारी टक्कर, भीड़ ने ट्रेलर ड्राइवर को पीटा, प्राइवेट-पार्ट पर मारी लात, दर्द से कराहते रहा, पुलिस ने बाल पकड़कर खींचा, वीडियो वायरल
The bus was hit, the crowd beat up the trailer driver, kicked him in his private part, he kept groaning in pain, the police pulled him by his hair, the video of this brutality went viral
कांकेर : छत्तीसगढ़ के कांकेर ज़िले में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है. 3 अगस्त को चारामा थाना क्षेत्र में एक ट्रेलर ने यात्रियों से भरी बस को टक्कर मार दी. हादसे में कोई यात्री घायल नहीं हुआ. लेकिन इसके बाद जो हुआ. उसने हादसे की भयावहता को पीछे छोड़ दिया. पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. जिसके बाद पुलिस पर मॉबलिचिंग के आरोप लग रहे हैं.
नेशनल हाईवे 30 में रविवार की दोपहर एक ट्रेलर चालक ने केशकाल घाट में बस को ठोकर मार दी। ठोकर मारने के बाद ट्रेलर चालक ट्रेलर सहित भाग निकला जिसे पीछा कर चारामा के पास पकड़ा गया. लेकिन उसके बाद जो हुआ उसने पुलिस पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ट्रेलर चालक को ट्रेलर में चढ़कर लोग मारते रहे जिसके बाद चारामा थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे और ट्रेलर से नीचे उतारते ही चालक पर थप्पड़ बरसा दिया. इसके बाद उनके अधीनस्थ पुलिसकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों को जैसे चालक को पीटने का लाइसेंस मिल गया.
ट्रेलर चालक को पकड़ने के बाद पुलिस और स्थानीय भीड़ ने मिलकर सड़क पर ही इन्साफ का तमाशा शुरु कर दिया. वीडियो में साफ दिख रहा है :- “ड्राइवर को घेरकर लात-घूंसे मारे जा रहे हैं. पुलिसकर्मी उसके बाल पकड़कर सड़क पर घसीट रहे हैं और इस बीच भीड़ में मौजूद एक युवक उसके प्राइवेट पार्ट पर जोरदार लात मारता है.” वह दर्द से कराहता रहा. लेकिन पुलिस की मौजूदगी में यह हिंसा थमी नहीं. बल्कि पुलिस खुद भी इसमें शामिल दिखी. यह नजारा किसी सभ्य समाज का नहीं. बल्कि जंगल राज का था.
मालूम हो कि वारदात के वक्त भीड़ में शामिल एक शख्स ने ड्राइवर से मारपीट का वीडियो बना लिया. जो अब वायरल हो रहा है.
बस को टक्कर मारने के बाद ट्रेलर चालक मौके से भागा. पुलिस की हाईवे पेट्रोलिंग टीम और कांकेर से भेजी गई. दूसरी टीम उसका पीछा करती रही. मचांदुर नाका पर ट्रक खड़ा कर रास्ता रोका गया और चालक को पकड़ा गया. लेकिन गिरफ्तारी की प्रक्रिया कानूनन करने के बजाय पुलिस ने भीड़ को खुली छूट दी और खुद भी मारपीट में शामिल हो गई. चालक चीखता रहा, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और लोगों को तरस नहीं आया.
चारामा थाना प्रभारी जितेंद्र साहू ने घटना से इंकार कर दिया और कहा कि ड्राइवर को बस वाहन से उतारकर थाने भेजा गया था. लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पुलिस के दावे को कमजोर कर देता है. जिसमें पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में ड्राइवर की पिटाई और घसीटने के नजारे साफ दिख रहे हैं.
चालक यूनियन संघ के जिलाध्यक्ष याकूब गोरी ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा – “पुलिस का काम आरोपी को थाने ले जाकर कानून के तहत कार्रवाई करना है. न कि आम पब्लिक से सजा दिलाना और खुद सजा देना. वर्दीवालों का यह रवैया इंसाफ के नाम पर गुंडागर्दी है.”
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस के उच्च अधिकारियों ने जांच बैठा दी है. एसडीओपी मोहसिन खान का कहना है कि वीडियो देखने के बाद मामले की जांच की जा रही है, दोषियों पर कार्यवाही भी की जाएगी. बताया जा रहा है कि चालक नशे में भी नहीं था. घाट में बस के पिछले हिस्से से ट्रेलर की टक्कर हुई थी. जिसके बाद चालक डर गया और ट्रेलर लेकर भागने लगा.
यह पहली बार नहीं है जब वर्दीवालों की मौजूदगी में इंसानियत को रौंदा गया हो. महज दो दिन पहले पंजाब से भी एक वीडियो सामने आया है. जिसमें 1 अगस्त को सरेराह एक पत्रकार की जानलेवा पिटाई पुलिसकर्मी करते दिख रहे हैं. उस हमले में गंभीर रुप से घायल पत्रकार की मौत हो चुकी है. यह दो अलग-अलग राज्यों की घटनाएं भले हों, लेकिन तस्वीर एक ही है — वर्दी के नाम पर कानून को ठेंगा दिखाना और भीड़तंत्र जैसा व्यवहार करना.
कांकेर और पंजाब की घटनाएं एक ही संदेश देती हैं – जब कानून के रक्षक खुद हिंसा में शामिल हों, तो इंसाफ और मानवाधिकार की उम्मीद कैसे की जाए? अगर इस बर्बरता पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई. तो आने वाले दिनों में कानून के नाम पर हिंसा और भी खुलकर नाचेगी. और कोई भी सड़क पर ‘न्याय’ के बजाय ‘लाठी’ का शिकार बन सकता है.
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