कबीरधाम में 17वीं बटालियन सरेखा से इंसास रायफल चोरी कर फिरौती मांगने वाला आरोपी आरक्षक समेत सुकित केसरवानी गिरफ्तार, दो मामले दर्ज
Constable Sukit Kesarwani, accused of stealing INSAS rifle from 17th battalion Sarekha in Kabirdham and demanding ransom, arrested, two cases registered.
कबीरधाम : 3 नवंबर 2024 को 17वीं बटालियन छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (CAF) के सरेखा स्थित मुख्यालय कैंप से एक इंसास रायफल, 20 राउंड कारतूस और मैगजीन चोरी हो गई. इस गंभीर घटना में शामिल आरोपी आरक्षक नरोत्तम रात्रे को कबीरधाम पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. इस मामले में दो अलग-अलग जुर्म दर्ज किए गए हैं:
1. अपराध क्रमांक-689/2024, धारा 331(2), 305(ड.) BNS 2023 IPC (रायफल चोरी का मामला)।
2. अपराध क्रमांक-752/2024, धारा 308(2) bns.2023 (फिरौती मांगने का मामला)।
आरोपी नरोत्तम रात्रे 17वीं बटालियन का ही आरक्षक है. जो वर्तमान में चिकपाल कैंप, थाना कटेकल्याण, जिला दंतेवाड़ा में पदस्थ है। उसका स्थायी निवास ग्राम धाबाडीह, थाना लवन, जिला बलौदाबाजार है.
आरोपी ऑनलाइन जुआ सट्टा खेलने का आदि था. और उसके ऊपर करीब 4 लाख रुपये का कर्ज था. आरोपी ने अपना कर्जा पटाने के लिए इस घटना की प्लान बनाई. आरोपी ने चोरी की घटना से पहले 1 महीने की छुट्टी लिया था. छुट्टी के दौरान 15 दिन वह सरेखा कैंप में ही अपने निवास पर रुका. जहां उसने कैंप में रेकी कर रायफल चोरी की पूरी प्लानिंग की. इसके बाद वह अपने परिवार के साथ अपने गांव चला गया. घटना के दिन आरोपी अपने गांव से बाइक लेकर सरेखा कैंप पहुंचा.
3 नवंबर 2024 को आरोपी नरोत्तम रात्रे ने कैंप की बाउंड्री के बाहर बाइक खड़ी की और चोरी-छिपे कैंप के अंदर प्रवेश किया. आरोपी पहले सरेखा कैंप में तैनात रह चुका था और वहां की व्यवस्थाओं से भली-भांति परिचित था. इसलिए वह ऐसे जगह से कैंप के अंदर दाखिल हुआ कि कोई उसे देख न पाए. उसने गार्ड रुम में जाकर ड्यूटी पर तैनात जवानों के बीच ड्यूटी बदली के समय का फायदा उठाते हुए इंसास रायफल, मैगजीन और 20 राउंड कारतूस चुरा लिया. यह चोरी शाम 6:30 बजे से रात 10 बजे के बीच की गई.
घटना के बारे में कैंप के जवानों को तब पता चला जब रात में जवानों ने गार्ड रुम में लौटकर अपने हथियारों की जांच की. इस मामले में थाना कवर्धा में 4 नवंबर 2024 को अपराध क्रमांक-689/2024, धारा 331(2), 305(ड.) BNS 2023 IPC के तहत मामला दर्ज किया गया.
चोरी के तीन हफ्ते बाद 6 दिसंबर 2024 और उसके बाद जिस जवान की राइफल चोरी हुई थे उसे आरोपी द्वारा अलग-अलग नंबरों से मैसेज किया जा रहा था. जिसमें राइफल वापस करने के बदले पैसे की मांग की गई आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी नाम से नया सिम और मोबाइल खरीदा और अलग-अलग समय पर मैसेज भेजे. उसने पीड़ित को बार-बार मैसेज भेजकर पैसे की मांग की और पैसे न देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी.
आरोपी ने राइफल देने के एवज में 10 लाख रुपए की मांग की थी. और रुपये बिलासपुर-जांजगीर चांपा रोड के एक सुनसान जगह में रखकर जाने के बाद राइफल मिल जाएगा. ऐसा बताया. पुलिस ने आरोपी को फर्जी सिम उपलब्ध कराने वाले उसके साथी सुकित केसरवानी (पिता- सुशील केसरवानी, उम्र-40 साल, निवासी वार्ड नंबर-11, गोधापारा, थाना शिवरीनारायण) को भी गिरफ्तार कर लिया है. साथी ने पूछताछ में यह कबुल किया कि उसने आरोपी को फर्जी सिम उपलब्ध कराई थी. इस आधार पर थाना कवर्धा में अपराध क्रमांक-752/2024, धारा 308(2) bns.2023 दर्ज किया गया.
पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह (IPS) के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र बघेल और पंकज पटेल तथा एसडीओपी प्रतीक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में विशेष जांच टीम का गठन किया गया.
टीम में थाना प्रभारी कवर्धा लालजी सिन्हा, साइबर सेल प्रभारी आशीष कंसारी, और ASI चंद्रकांत तिवारी, ASI कौशल साहू, बीरबल साहू, सुरेश जयसवाल, प्रधान आरक्षक खूबी साहू, प्रधान आरक्षक अभिनव तिवारी, चुम्मन साहू, आरक्षक विजय शर्मा, अजय यादव, महिल आरक्षक दीपा राय एवं थाना कोतवाली वो साइबर सेल के अधिकारी कर्मचारी शामिल थे.
टीम ने आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए गए नंबरों का विवरण खंगाला. आरोपी ने जिस फर्जी सिम का इस्तेमाल किया था. उसे उपलब्ध कराने वाले साथी को हिरासत में लिया गया. साथी ने आरोपी को पहचान लिया और उसकी मदद करने की बात कबूल की. आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ किया गया और उसकी निशानदेही पर चोरी की गई इंसास रायफल, 20 राउंड कारतूस और मैगजीन को आरोपी द्वारा छुपाए गए स्थान से बरामद कर ली गई.
पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह (IPS) ने बताया: पुलिस ने समयबद्ध तरीके से काम करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर चोरी की गई रायफल को बरामद कर लिया. इस मामले में शामिल सभी अधिकारियों का सहयोग सराहनीय रहा है.
इस जटिल मामले की जांच और कार्रवाई में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र बघेल और पंकज पटेल, तथा एसडीओपी प्रतीक चतुर्वेदी का मार्गदर्शन और योगदान विशेष रुप से उल्लेखनीय रहा.
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