चुनाव से पहले नक्सलियों की कायराना करतूत, आधी रात घर में घुसकर सरपंच प्रत्याशी को उतारा मौत के घाट, 4 दिन के अंदर चार लोगों का कत्ल
Cowardly act of Naxalites before the elections, they entered the house in the middle of the night and killed the Sarpanch candidate, four people were murdered within 4 days
दंतेवाड़ा : नक्सलियों की एक बार फिर कायराना करतूत सामने आई है. जिसमें सरपंच प्रत्याशी की उसके घर में घुसकर हत्या कर दी. दो दिनों में दो लोगों की हत्या से क्षेत्र के लोगों में दहशत है. बताया जा रहा है कि नक्सलियों ने बीते चार दिनों के अंदर चार लोगों को अब तक मौत के घाट उतार चुके हैं. घटना दंतेवाड़ा जिले के अरनपुर की है. इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है.
मिली जानकारी के मुताबिक अरनपुर गांव के जोगा बारसे उम्र 45 साल सरपंच पद के उम्मीदवार थे। गुरुवार रात करीब 12 बजे नक्सली कुल्हाड़ी और अन्य धारदार हथियारों के साथ जोगा के घर पहुंचे. उन्होंने दरवाजा तोड़कर घर में प्रवेश किया और जोगा पर ताबड़तोड़ हमला किया. परिवार के लोग इस दौरान चीखते-चिल्लाते रहे, लेकिन नक्सलियों ने एक भी नहीं सुनी. हमलावरों की तादाद करीब 5-6 थी और उन्होंने अपना चेहरा कपड़े से ढक रखा था ताकि अपनी पहचान छिपा सकें. घटना की एएसपी आरके बर्मन ने पुष्टि की है.
बता दें कि सुरक्षाबलों की बस्तर के अंदरुनी इलाके तक धमक से ग्रामीणों के बीच घटते वर्चस्व को लेकर नक्सली परेशान और हताश हैं. ऐसे में सुरक्षा बलों की छोटी-बड़ी कामयाबी के लिए ग्रामीण आदिवासियों को जिम्मेदार ठहराते हुए नक्सली उन्हें मौत के घाट उतार रहे हैं. लगातार दो दिनों में दो लोगों की हत्या से क्षेत्र के निवासियों में दहशत देखी जा रही है.
जोगा बारसे की पत्नी पहले अरनपुर की सरपंच रह चुकी हैं. लेकिन इस बार पुरुष सीट के चलते जोगा खुद चुनाव लड़ रहे थे. बताया जा रहा है कि इससे पहले भी नक्सलियों ने जोगा को धमकी दी थी. लेकिन इस बार उन्होंने उसे जान से मार डाला.
स्थानीय लोगों ने बताया कि सरपंची का चुनाव लड़ रहे जोगा बारसे पिछले 25 सालों से राजनीति में एक्टिव थे और क्षेत्र के दमदार आदिवासी नेता थे, वह पहले भी सरपंच रह चुके थे, जबकि महिलाओं के लिए सीट आरक्षित होने पर उनकी पत्नी चुनाव लड़ती थी. वह पिछले कई चुनावों से लगातार जीत रहे थे. सन 2000 से अरनपुर गांव में जोगा के परिवार से ही लोग सरपंच बन रहे थे, जबकि वह एक बार जनपद सदस्य भी रह चुके थे. लेकिन 2019 के बाद वह सीपीआई छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे. लेकिन सियासी तनाव बढ़ने के बाद नक्सलियों ने उनकी हत्या कर दी.
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